श्रीनगर। ग्रामीण विकास विभाग (आरडीडी) और पंचायती राज विभाग के सचिव मोहम्मद अब्दुल इयाज असद ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में मनरेगा के कार्यों की समीक्षा की।
ग्रामीण आजीविका और आर्थिक लचीलेपन को बनाए रखने में मनरेगा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सचिव ने जिलों से आग्रह किया कि वे स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी और उपयोगी संपत्तियां बनाने वाले कार्यों को प्राथमिकता दें। जिला स्तर पर अधिक जवाबदेही तय करने पर जोर देते हुए कहा कि सभी ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए सहायक आयुक्त विकास (एसीडी) नोडल अधिकारी होते हैं।
उन्होंने कहा कि समय पर निगरानी और पर्यवेक्षण की पूरी जिम्मेदारी एसीडी की है। सचिव ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि 31 अक्टूबर 2025 तक सभी पंजीकृत मनरेगा श्रमिकों, चाहे वे सक्रिय हों या निष्क्रिय, का ई-केवाईसी पूरा किया जाए। कहा कि पिछले वित्तीय वर्षों के सभी लंबित कार्यों को भौतिक रूप से पूरा किया जाए ताकि जमीनी स्तर पर वास्तविक प्रगति दिखाई दे।
बैठक में आरडीडी कश्मीर के निदेशक शबीर हुसैन भट्ट, आरडीडी जम्मू की निदेशक शहनवाज अख्तर, मुख्य परिचालन अधिकारी रजनीश गुप्ता, सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। संवाद-