अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जीएमसी श्रीनगर के एनेस्थिसियोलॉजी, क्रिटिकल केयर, दर्द एवं उपशामक देखभाल चिकित्सा विभाग ने मंगलवार को विश्व धर्मशाला एवं उपशामक देखभाल दिवस के उपलक्ष्य में एक वाकथॉन का आयोजन किया।
उपशामक देखभाल के लिए करुणा की यात्रा विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य जीवन-सीमित बीमारियों से ग्रस्त रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में उपशामक देखभाल के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। निशात से शुरू होकर डक पार्क में समाप्त हुए इस वाकथॉन में संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेजिडेंट, स्नातकोत्तर और स्नातक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल/डीन, प्रो. (डॉ.) इफ्फत हसन ने वॉक का नेतृत्व किया और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के एक अनिवार्य हिस्से के रूप में उपशामक देखभाल के बारे में जागरूकता पैदा करने के उनके प्रयासों के लिए विभाग की सराहना की।
उन्होंने कहा कि दर्द और अन्य लक्षणों की शीघ्र पहचान, आकलन और प्रबंधन के माध्यम से जीवन को सीमित करने वाली बीमारियों वाले रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में उपशामक चिकित्सा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने उपचारात्मक से उपशामक चरणों तक देखभाल की निरंतरता को मजबूत करने और समुदाय-आधारित आउटरीच को बढ़ावा देने पर जोर दिया।