- लोगों में खौफ, नगर निकायों ने नसबंदी रोके जाने और धन की कमी का हवाला दिया
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोगों में भय व्याप्त है। अंधेरा होने के बाद लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लग रहा है। गांदरबल जिले की तहसील लार के वालीवार इलाके में पांच दिन में कुत्तों ने 20 लोगों को अपना निशाना बनाया है।
हालांकि श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) अब तक जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है। शहर के जवाहर नगर, सनत नगर, छानपोरा और कई अन्य इलाके के लोग कुत्तों के कारण खौफजदा हैं। नगर निगम अधिकारी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों को मारने पर प्रतिबंध लगा दिया है। निवासियों का तर्क है कि उनकी आबादी को नियंत्रित करने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक उपाय अभी भी लागू किए जा सकते हैं।
श्रीनगर नगर निगम के सूत्रों ने बताया कि आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए निर्धारित धनराशि में भारी कटौती कर दी गई है जिससे निगम के पास कार्रवाई करने के लिए बहुत कम जगह बची है। एक वरिष्ठ एसएमसी अधिकारी ने कहा कि धन में कटौती के कारण कुत्तों की नसबंदी परियोजना का कार्यान्वयन लगभग रुक गया है। श्रीनगर में इस पहल को लागू करने के लिए उचित योजना, तंत्र और संसाधनों की आवश्यकता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस मद में धनराशि लगातार कम होती जा रही है और अब हम आगे बढ़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
इस बीच मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले की तहसील लार के वालीवार इलाके में पांच दिन में कुत्तों की ओर से लगभग 20 लोगों को निशाना बनाए जाने से पूरे इलाके में दहशत फैली हुई है। घायलों को पास के स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया गया जबकि कुछ को विशेष उपचार के लिए स्किम्स सोवरा और बोन एंड जॉइंट हॉस्पिटल बरजल्ला रेफर कर दिया गया।
कई पीड़ित अभी भी चिकित्सा देखभाल में हैं जबकि अन्य को छुट्टी दे दी गई है लेकिन उन्हें रोजाना एंटी-रैबीज इंजेक्शन लेने की जरूरत है। लोग घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं। खासकर स्कूली बच्चे कक्षाओं में जाने से कतरा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने गांदरबल नगर परिषद को इस मुद्दे के बारे में बार-बार सूचित किया है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि अब निवासी कुत्तों के हमले के डर से आसपास के नालों से पानी पीने से कतराने लगे हैं।