श्रीनगर। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में हथकरघा और हस्तशिल्प (एचएंडएच) विभागों के विलय के बाद उनके प्रदर्शन और कार्यप्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने अगली बैठक में विलय से पहले और बाद के वर्षों का समेकित डेटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री को जम्मू-कश्मीर में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को लाभ पहुंचाने वाली प्रमुख योजनाओं और नीतियों के बारे में जानकारी दी गई जो नई ऊन, हस्तशिल्प और हथकरघा नीति 2020 की अधिसूचना के बाद लागू की गई हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विलय से पहले और बाद के वर्षों का समेकित डेटा प्रस्तुत किया जाए जिसमें दोनों क्षेत्रों की विभागीय योजनाओं का उल्लेख हो ताकि दोनों क्षेत्रों के लिए एक दूरगामी रोडमैप तैयार किया जा सके।
उन्होंने विभाग को जम्मू-कश्मीर में शिल्प क्षेत्र के प्रचार के लिए एक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करने की सलाह भी दी। उन्होंने दोहराया कि सरकार कारीगरों और बुनकरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हस्तशिल्प और हथकरघा विभागों को कारीगरों और बुनकरों के व्यापक हितों की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग को दोनों क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा देने के उद्देश्य से हितधारकों के साथ नए सिरे से परामर्श करना चाहिए।
इससे पहले उपमुख्यमंत्री ने हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र के प्रतिनिधियों की बात सुनी, ताकि संबंधित हितधारकों से प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया प्राप्त की जा सके। उन्होंने प्रतिनिधिमंडलों को आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं की जांच कर समाधान किया जाएगा।