श्रीनगर। जिले की एक अदालत ने एक पुलिस उप-निरीक्षक को अवैध सेवा लाभ प्राप्त करने के लिए अपनी जन्मतिथि में हेराफेरी करने के आरोप में दोषी ठहराया और तीन साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
अपराध शाखा ने बडगाम निवासी उप-निरीक्षक जगदीश सिंह के खिलाफ सरकारी रिकॉर्ड में जन्मतिथि में हेराफेरी करने का मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान, अधिकारी का मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र सत्र 1974, सत्यापन के लिए जम्मू और कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड को भेजा गया था।
अधिकारियों ने प्रमाणपत्र के फर्जी और मनगढ़ंत होने की पुष्टि की और उसकी वास्तविक जन्मतिथि 10 नवंबर, 1957 प्रमाणित की। हालांकि आरोपी ने अपने सेवा दस्तावेजों, जिसमें चरित्र पंजिका और मैट्रिकुलेशन रिकॉर्ड में धोखाधड़ी से इसे 10 नवंबर, 1959 कर दिया था, ताकि अवैध रूप से दो साल का सेवा विस्तार और संबंधित लाभ प्राप्त कर सके।
मुकदमे के दौरान अपराध शाखा ने इस दावे के समर्थन में लगभग सोलह गवाह पेश किए। ग्यारह साल की लंबी सुनवाई के बाद श्रीनगर के नगर न्यायाधीश अब्दुल बारी ने आरोपी को दोषी पाया। अदालत ने माना कि अधिकारी ने जानबूझकर अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में हेराफेरी करके निजी लाभ के लिए अधिकारियों को धोखा दिया था और तदनुसार उसे तीन साल के साधारण कारावास और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। संवाद