बोन एंड जॉइंट अस्पताल श्रीनगर में दैनिक ओपीडी 1000, सोमवार और मंगलवार को रहती है 1300-1500 मरीजों की संख्या
विशेषज्ञ बोले- 90 फीसदी रोगियों का परिधीय अस्पतालों में इलाज संभव
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। श्रीनगर के बरजुल्ला इलाके में स्थित सरकारी बोन एंड जॉइंट अस्पताल में आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) में औसतन 1000 मरीज आ रहे हैं, जबकि अस्पताल के अधिकारियों का दावा है कि उनमें से 90 फीसदी का इलाज परिधीय अस्पतालों में संभव है। अनावश्यक रैफरल गंभीर मरीजों के उपचार को प्रभावित कर रहा है। अस्पताल में तैनात डॉक्टरों के अनुसार ओपीडी में जम्मू-कश्मीर सहित लद्दाख से औसतन 1000 मरीज आते हैं। सोमवार और मंगलवार को ओपीडी मरीजों की संख्या 1300-1500 तक भी पहुंच जाती है, जबकि अन्य दिनों में यह 800 और 900 के बीच रहती है।
उन्होंने बताया जिला और उप जिला अस्पतालों से प्रतिदिन दर्जनों मरीजों को अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। यह अस्पताल घाटी का सबसे बड़ा तीसरा देखभाल हड्डी और जोड़ों का अस्पताल है। लेकिन अनावश्यक रैफरल से अस्पताल के सीमित संसाधनों पर दबाव पड़ता है। अस्पताल के एक शीर्ष डॉक्टर ने बताया कि ओपीडी में आने वाले और अस्पताल में रेफर किए गए लगभग 90 प्रतिशत रोगियों का परिधीय अस्पतालों में इलाज किया जा सकता है। जब मरीजों की भारी भीड़ होती है, तो अधिक जरूरत वाले मरीजों को अधिक समय नहीं दे पाते हैं।
120 विस्तर का न्या ब्लॉक बनने से मिलेगी राहत
कश्मीर में आर्थोपेडिक उपचार सुविधाएं बढ़ने वाली हैं, क्योंकि बोन एंड जॉइंट अस्पताल बरजुल्ला में 120 बिस्तरों वाला ब्लॉक इस साल के अंत तक तैयार हो जाएगा। पिछले साल मार्च में आग लगने से अस्पताल को भारी नुकसान हुआ था। एक शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि घाटी के सबसे बड़े ऑर्थोपेडिक अस्पताल को अत्याधुनिक अतिरिक्त 120-बेड वाले अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के साथ एक बड़ा ढांचागत प्रोत्साहन मिलने वाला है। ब्लॉक का निर्माण विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित जेटीएफआरपी (झेलम तवी बाढ़ रिकवरी परियोजना) के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के घटक के तहत किया जा रहा है। परियोजना पर काम 2019 में शुरू हुआ और 2015 में मंजूरी दी गई। अस्पताल को 2014 की बाढ़ में बड़ी क्षति हुई थी। अधिकारी ने कहा, उप-परियोजना पर काम 88.94 करोड़ रुपये की लागत से एनपीसीसी (राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम) को आवंटित किया गया है, जिसमें पर्यावरण डिजाइन, रोगी कल्याण, मैक्रो/सूक्ष्म स्तर ज़ोनिंग, भविष्य के विकास की गुंजाइश और इष्टतम क्षेत्र उपयोग को भी ध्यान में रखा गया है। अस्पताल के एक शीर्ष डॉक्टर के अनुसार पिछले साल की आग की घटना के बाद से उन्हें मरीजों की भारी भीड़ को संभालने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए भवन के बन जाने से डॉक्टरों के साथ-साथ मरीजों को भी राहत मिलेगी।