भट की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो चुनौतियां को बाधा मान लेते हैं
श्रीनगर। सेना के पूर्व स्नाइपर आमिर अहमद भट पैरालिंपिक में पदक जीतने को बेताब हैं। नियंत्रण रेखा पर एक मिशन के दौरान बारूदी सुरंग विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद भी उनका हौसला डिगा नहीं। भट अब तक सात अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं और पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत सहित कई पदक जीते हैं। वह कहते हैं, चुनौतियां मेरे लिए बाधाएं नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का अवसर होती हैं।
भारतीय सेना के एक जूनियर कमीशंड अधिकारी के रूप में शुरुआत करने वाले भट के जीवन में 2018 में बड़ा मोड़ आया। नियंत्रण रेखा पर एक मिशन के दौरान माइन विस्फोट में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे ने जिंदगी को एक अलग मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। पर, उन्होंने भी हालात से कह दिया-मेरा हौसला बड़ा है। अपने पुराने हुनर से जिंदगी को नया मकसद दिया और शूटिंग प्रतियोगिताओं की ओर बढ़ चले।
अनंतनाग के 30 वर्षीय शार्प शूटर भट ने खेलो इंडिया पैरा गेम्स में मिक्स्ड 25 मीटर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में रजत पदक जीता। पेरिस 2024 पैरालिंपिक में भी ले गई और वह सेना और जम्मू-कश्मीर से इस खेल महाकुंभ के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले पहले पैरा शूटर बन गए।
भट कहते हैं, मैं सेना में स्नाइपर था, गोलीबारी तकनीकों में प्रशिक्षित था। जब चोट लगी तो मुझे खेल के रूप में निशानेबाजी के बारे में कुछ नहीं पता था। भट कहते हैं यह सब संभव हुआ एक सहयोगी कर्नल की वजह से जिन्होंने चोट से परे मुझमें संभावनाएं देखीं। मुझे पैरा निशानेबाजी में हाथ आजमाने के लिए बुलाया गया।
यह भट का जुनून ही था कि बहुत ही कम समय में वह एक सैन्य स्नाइपर से पैरालंपिक एथलीट बन गए। महज दो साल में भट अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छाप छोड़ चुके हैं। उन्होंने सात अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पैरा विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण व रजत सहित कई पदक जीते। खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 में उनकी हालिया उपलब्धि उनकी असाधारण यात्रा में एक और मील का पत्थर है। रजत पदक के अलावा, भट ने पुरुषों की 50 मीटर पिस्टल एसएच-1 के फाइनल के लिए भी क्वालीफाई किया, जहां वह 8वें स्थान पर रहे। एजेंसी/ संवाद