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Jammu News: हुबली के मैदान पर चमका कठार का सितारा

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- ग्राउंड रिपोर्ट : टीवी स्क्रीन पर टिकीं निगाहें, हर गेंद पर दुआएं और फिर ढोल की थाप पर अखनूर में जश्न
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- नाै मैचों में 31 विकेट लेकर कठार के सुनील ने रचा इतिहास


अतुल सूदन

कठार (अखनूर)। शनिवार की दोपहर। अखनूर से 35 किलोमीटर दूर बसे छोटे से गांव कठार में आज सन्नाटा नहीं बल्कि एक अजीब सी बेचैनी और उम्मीदों का शोर है। फौजी रामलाल वर्मा के घर के एक छोटे से कमरे में पूरा परिवार सिमटा हुआ है। सबकी नजरें टीवी स्क्रीन पर जमी हैं। कठार में मां राखा देवी के हाथ दुआओं में उठे हैं। हुबली के मैदान पर जीत की दहलीज पर खड़े जम्मू-कश्मीर के लिए बस आखिरी कुछ लम्हों का इंतजार है। जैसे ही आधिकारिक जीत की घोषणा हुई पूरा गांव मानो एक साथ चीख पड़ा... हम जीत गए!


खेतों की पगडंडियों से शुरू हुआ सफर आज इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। नाै मैचों में 31 विकेट लेकर टूर्नामेंट के ''हीरो'' बने बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सुनील कुमार का जम्मू-कश्मीर को 67 साल बाद रणजी ट्रॉफी का ताज पहनाने में अहम योगदान रहा। टीवी स्क्रीन पर बेटे को जीत की खुशी मनाते देख पिता रामलाल वर्मा की आंखों से गर्व के आंसू छलक पड़े। बहन सोनिया, स्वीटी और सीमा के चेहरे खिल उठे। मानो उनकी बरसों की तपस्या सफल हो गई हो। मैच खत्म होते ही सन्नाटा जश्न में बदल गया।
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पूर्व सरपंच रोहित शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों का हुजूम ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के डिब्बों के साथ सुनील के घर पहुंच गया। ढोल की थाप पर पूरा परिवार और पड़ोसी झूमने लगे। मां रेखा देवी ने भरे गले से सबको मिठाई खिलाई। संवाद प्रतिनिधि से बात करते हुए वह भावुक हो गईं... मेरा बेटा आज बड़ा स्टार बन गया है। भगवान ऐसा बेटा सबको दे। पिता ने रुंधे गले से कहा - हमने उसे कभी नहीं रोका, आज उसने हमारा सीना चौड़ा कर दिया है।


यह वही सुनील है जो कभी इसी गांव की मिट्टी में कोस्को बॉल से खेलता था। बिना किसी आधुनिक सुविधा के घर के पास खुद पिच बनाकर पसीना बहाने वाले सुनील का संघर्ष आज कहानी बन गया है। कॉलेज से पहले लेदर बॉल को न छूने वाले इस लड़के ने कोच अजय शर्मा और गेंदबाजी कोच पी कृष्णकुमार के मार्गदर्शन में खुद को स्विंग का जादूगर बना लिया। हर रोज स्कूटी से 70 किलोमीटर का सफर तय कर स्पोर्ट्स हॉस्टल पहुंचने का अनुशासन आज रंग लाया है।
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गांव की चौपाल पर अब एक ही
चर्चा... सुनील का भव्य स्वागत
सिंह क्रिकेट क्लब अखनूर के चेयरमैन शाम सिंह लंगेह कहते हैं कि यह उपलब्धि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए मिसाल का काम करेगी। आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ नेट बॉलर के रूप में बिताया समय और अब रणजी की यह ऐतिहासिक जीत सुनील को टीम इंडिया की जर्सी के और करीब ले आई है। हुबली से लेकर कठार तक आज केवल सुनील के नाम की गूंज है। गांव वाले अब उस पल का इंतजार कर रहे हैं जब उनका लाडला इस ऐतिहासिक ट्रॉफी के साथ अपनी मिट्टी पर कदम रखेगा। पंचायत में स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं क्योंकि कठार का बेटा अब सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं की उम्मीद बन चुका है।
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