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Jammu News: श्रीराम केवल एक नाम ही नहीं, बल्कि मानव जीवन का आधार हैं

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-सनोत्रा बिरादरी के कालीवीर मंदिर रामगढ़ में सुंदरकांड कथा का समापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। भगवान श्रीराम केवल एक नाम भर नहीं, बल्कि वे जन-जन के कंठहार और जीवन का आधार हैं। यह प्रवचन सनोत्रा बिरादरी के कालीवीर मंदिर रामगढ़ में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से कराई जा रही सुंदरकांड कथा में साध्वी दीक्षा भारती ने किए। रविवार को कथा के अंतिम दिन काफी संख्या में संगत का सैलाब उमड़ा।
साध्वी ने कहा कि श्रीराम के नाम से ही भारत अर्थ पाता है। वे भारत के प्रतिरूप हैं। उनमें कोटि-कोटि जन जीवन की सार्थकता पाता है। भारत का कोटि-कोटि जन उनकी आंखों से जग जीवन को देखता है। उनके दृष्टिकोण से जीवन के संदर्भों, परिप्रेक्ष्यों स्थितियों, परिस्थितियों, घटनाओं व प्रतिघटनाओं का मूल्यांकन व विश्लेषण करता है। भारत से राम और राम से भारत को अलग करने के भले कितने कुचक्र-कलंक रचे जाएं, भले कितनी विदेशी कुचालें चली जाएं, यह संभव हो ही नहीं सकता, क्योंकि राम भारत की आत्मा हैं। राम भारत के पर्याय हैं। जिस प्रकार आत्मा को शरीर से और शरीर को आत्मा से कोई अलग नहीं कर सकता, उसी प्रकार राम को भारत से अलग नहीं किया जा सकता है। राम के सुख में भारत के जन-जन का सुख आश्रय पाता है। उनके दुख में भारत का कोटि-कोटि जन आंसुओं के सागर में डूबने लगता है। वे अश्रु-धार भी ऐसे परम-पुनीत हैं कि तन-मन को निर्मल बना जाते हैं।
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साध्वी ने कहा कि प्रभु राम के अंतर जगत में दर्शन के लिए हनुमान जी जैसे संत का जीवन में प्रदार्पण होना अत्यंत आवश्यक है। एक पूर्ण सतगुरु ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा से मानस अंतकरण में ही प्रभु के दिव्य, आलौकिक रूप के दर्शन करवा उसे भक्ति पथ पर अग्रसर कर सकता है। कथा के दौरान भक्तों ने विश्व कल्याण की मंगल भावना से वैदिक मंत्रों का जाप किया। जय श्रीराम के जयघोषों से वातावरण राममय हो गया। स्वामी हरिदासानंद, स्वामी सुचेतानंद, महात्मा रमन, दीप सहगल, महात्मा गुरुप्रीत ने भजन सुनाए। कथा के समापन पर आरती कर भंडारा लगाया गया।
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