जम्मू विश्वविद्यालय में अब चौबीस अक्तूबर को जनरल जोरावर सिंह सभागार विशेष दीक्षांत समारोह होगा। जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसकी अब नई तिथि घोषित होते ही गठित कमेटी तैयारियों में जुट गई है। गौरतलब है कि विशेष दीक्षांत समारोह पिछले 16 सितंबर को होने वाला था जिसे सितंबर के पहले सप्ताह में आई भीषण बाढ़ के कारण स्थगित करना पड़ा था।
जानकारी के मुताबिक वर्ष-2006 तथा 2012 के गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थी एवं विभिन्न विभागों के पीएचडी विद्यार्थियों को आयोजित होने वाले विशेष दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया जाएगा। जम्मू यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार मनोज धर का कहना है कि वह जम्मू शहर से बाहर थे, जिसको लेकर विशेष दीक्षांत समारोह की होने वाली घोषित नई तिथि के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी।
वहीं, उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम को वह जम्मू आए हैं और इसके बारे में बुधवार को छुट्टियों के बाद यूनिवर्सिटी खुलने के बाद ही हो रही खास तैयारियों के बारे में जानकारी मिल पाएगी। उन्होंने कहा कि सोलह सितंबर को विशेष दीक्षांत समारोह के लिए जो तैयारियां हो रही थीं, उसमें कोई तब्दीली नहीं होगी। विशेष दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो चांसलर मुख्यमंत्री तथा चांसलर राज्यपाल होंगे।
दीक्षांत समारोह की नई तिथि का विरोध
जम्मू यूनिवर्सिटी के विशेष दीक्षांत समारोह की तैयारियां पहले से ही जारी हैं। हालांकि सितंबर में आई भीषण बाढ़ के कारण सितंबर माह के मध्य में होने वाले दीक्षांत समारोह स्थगित कर दिया गया था। अब जम्मू यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा नई तिथि की घोषणा अधिसूचना के द्वारा कर दी गई है, जिससे विद्यार्थी असमंजस में है। इसका विरोध भी किया जाने लगा है, क्योंकि 23 अक्तूबर को दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है और दूसरे दिन भी पूजन आदि में घर-घर में व्यवस्तता रहती है।
इसकी अनदेखी करके जम्मू विश्वविद्यालय ने इस प्रकार का गलत निर्णय लेकर अधिसूचना। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राज्य संगठन मंत्री पवन शर्मा का कहना है कि जेयू प्रशासन द्वारा 24 अक्तूबर को करवाए जा रहे विशेष दीक्षांत समारोह को विद्यार्थी परिषद स्वीकार नहीं करती। विश्वविद्यालय द्वारा उठया गया यह कदम बिल्कुल अनुचित है। उन्होंने इस नई तिथि का विरोध करते हुए कहा कि प्रशासन से आग्रह किया कि विद्यार्थियों के हित में इस तिथि पर विचार किया जाए तथा विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों के हित में निर्णय लिया जाए।
उधर, एनएसयूआई के प्रदेश सचिव कमल मगोत्रा ने भी इस तिथि का विरोध किया है और कहा है कि जहां पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने बाढ़ के कारण इतने दिनों से विशेष दीक्षांत समारोह को स्थगित रखा, वैसे ही दिवाली के ठीक अगले दिन ही 24 अक्तूबर की तिथि निर्धारित करना उचित कदम नहीं है। इस तिथि को बदलना चाहिए।