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Jammu News: -15 डिग्री के पारे के बीच सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 10वें दिन भी जारी

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- लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी सूची में शामिल करने की मांग
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- लोगों से कल एक दिवसीय उपवास कर आंदोलन का समर्थन करने की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। माइनस 15 डिग्री तापमान के बीच पर्यावरणविद् इनोवेटर और इंजीनियर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन शुक्रवार को 10वें दिन में प्रवेश कर गया। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर वांगचुक ने छह मार्च से आमरण अनशन शुरू किया है। खुले आसमान तले माइनस 15 डिग्री में 110 लोगों के साथ वह अनशन पर बैठे हैं। लद्दाख पर्यावरण और संस्कृति के बचाव के लिए संघर्ष किया जा रहा है। वांगचुक को लद्दाख के अलग-अलग हिस्सों समेत देश भर के लोगों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने 17 मार्च को लोगों से एक दिवसीय उपवास कर आंदोलन का समर्थन करने का आग्रह किया है।
वांगचुक ने कहा कि भाजपा ने अपने मेनिफेस्टो में लद्दाख को संविधान की छठी सूची में शामिल करने का वादा किया था, लेकिन इसे पूरा नहीं किया गया। छठी अनुसूची महत्वपूर्ण जनजातीय आबादी वाले पहाड़ी क्षेत्रों में राज्यों को विशेष प्रशासनिक शक्तियां देती है। इसका कार्यान्वयन और लद्दाख को राज्य का दर्जा इसकी पारिस्थितिकी, पर्यावरण और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
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राजनेता केवल अगले पांच वर्षों की ही सोचते हैं

वांगचुक ने आरोप लगाया कि राजनेता केवल अगले पांच वर्षों के बारे में सोचते हैं और कुछ उद्योगपतियों के लाभ के लिए पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों को बेच देते हैं। स्थानीय लोगों को पीढ़ियों तक इसका परिणाम भुगतना पड़ता है। जब मानव जनित आपदाएं आती हैं तो इसकी लागत उन मुनाफों से अधिक होती है, लेकिन इसका भुगतान करदाताओं के पैसे से किया जाता है। यह कहानी पूरे हिमालय में हिमाचल से लेकर उत्तरांचल और सिक्किम तक दोहराई गई है। इसे चतुराई ही कहा जा सकता है, बुद्धिमत्ता नहीं। हम लद्दाख में मानते हैं कि हमें चतुराई की नहीं, बुद्धिमत्ता की जरूरत है।
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पांच मार्च को गृह मंत्रालय की सब
कमेटी के साथ बैठक रही थी बेनतीजा
गृह मंत्रालय की तरफ से लद्दाख के मुद्दों को लेकर बनाई गई सब कमेटी की बैठक पांच मार्च को बेनतीजा रहने के बाद से सोमन वांगचुक ने अनशन शुरू किया है। सब कमेटी में शामिल लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) के सदस्यों ने मीटिंग के बाद गृहमंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात भी की, लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार, पांच मार्च को हुई बैठक में छठे शेड्यूल से संबंधित मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कानूनी विशेषज्ञों के हवाले से स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर क्रियान्वयन में दो से तीन महीने का वक्त लगेगा। लेकिन लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधि इसे फौरन अमल में लाने पर जोर दे रहे हैं।
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