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जम्मू कश्मीर में सापों पर चढ़ी गर्मी, पढ़े खबर

Sat, 30 May 2015 10:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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पारे के लगातार चालीस डिग्री के आसपास रहने से इंसानों के साथ जीव जंतु भी बेहाल हैं। अस्पतालों में सर्पदंश, कुत्ते और बंदर के काटने के मामले बढ़ना शुरू हो गए हैं। सर्पदंश के अधिकांश मामले कंडी इलाकों से पहुंच रहे हैं।
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इन मामलों में ज्यादातर गंभीर मरीजों को डायलेसिस की जरूरत पड़ती है, लेकिन जिला स्तर पर कोई डायलेसिस की सुविधा न होने से मरीजों का जम्मू सुपर स्पेशलिटी आना मजबूरी है।

इनमें अक्सर झाड़फूंक के चक्कर में देरी से अस्पताल पहुंचाने पर मरीज की जान पर बन आती है। डाक्टरों के अनुसार आने वाले दिनों में उमस से सर्पदंश के मामलों में बढ़ोतरी होगी।
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नेफरोलाजी विभाग के एचओडी डा. एसके बाली के अनुसार मई में पारा चढ़ने के साथ सर्पदंश के मामलों में डायलेसिस के लिए मरीजों का पहुंचना शुरू हो गया है। सर्पदंश के अधिकांश मामलों में एक्यूट रेंडर फेलियर के पीड़ित की किडनी अचानक काम करना बंद कर देती है।

इसमें शरीर में खून तथा फ्ल्यूड की कमी और संक्रमण कई गुणा अधिक बढ़ जाता है। ऐसे गंभीर मरीजों को डायलेसिस मशीन पर रखा जाता है। सर्पदंश के मामलों के लिए जम्मू संभाग से जम्मू, कठुआ, आरएस पुरा, अखनूर, बिश्नाह, पुंछ, राजोरी आदि क्षेत्र प्रभावित रहे हैं।

पीड़ित को जहर से बचाने के लिए वैक्सीन एंटी वैनम सिरम दी जाती है। शरीर में कितना जहर फैला है, उसी के मुताबिक पीड़ित को इंजेक्शन की डोज दी जाती है। सांपों की बात करें तो संभाग में समय के साथ बदलाव के चलते शहरी इलाकों में अब कोबरा, वाइपर जैसे सांपों की मौजूदगी बढ़ी है।

ये जीव कोल्ड ब्लड एनिमल की श्रेणी में आते हैं, जिससे धरती के नीचे गर्मी और तपिश बढ़ने पर यह आक्रामक हो जाते हैं। जीएमसी की एंटी रैबिज सेक्शन में भी कुत्ते और बंदर के काटने के मामलों में वृद्धि हुई है। पीड़ित को  0-3-7-28 दिन पर वैक्सीन की डोज दी जाती है।
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