जम्मू-कश्मीर का अखरोट 700-800 रुपये किलो बिक रहा है। वहीं चीनी अखरोट 350-400 रुपये में बाजार में पहुंच रहा है। कीमत में करीब दोगुने के इस फर्क ने अखरोट कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। कारोबारियों का कहना है कि नेपाल के रास्ते सस्ता चीनी अखरोट भारत पहुंच रहा है। इससे कश्मीर में स्थानीय अखरोट की बिक्री प्रभावित हो रही है।
देश में पैदा होने वाले अखरोट में जम्मू-कश्मीर की 90 फीसदी हिस्सेदारी है। अनंतनाग, बडगाम, पुलवामा और बारामुला समेत कश्मीर के कई इलाकों में परिवार इस फसल पर निर्भर हैं। 2020 में कश्मीरी अखरोट की बिक्री करीब 1.70 लाख मीट्रिक टन थी, जो 2024 में घटकर करीब 30 हजार मीट्रिक टन रह गई। कारोबारियों ने सस्ते चीनी अखरोट को इस गिरावट की बड़ी वजह बताया गया है। जम्मू-कश्मीर वॉलनट एक्सपोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुजीव जैन का कहना है कि चीन से आने वाले छिलके वाले अखरोट पर 100 फीसदी आयात शुल्क है। वहीं अफगानिस्तान के अखरोट को दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौते के तहत शुल्क में छूट मिलती है। इसी फर्क का फायदा उठाकर चीनी अखरोट बाजार में दूसरे देश का माल बताकर बेचा जा रहा है और आयत शुल्क भी बचाया जा रहा है।
चीनी अखरोट की खेप रोकने और कागजों की जांच की मांग
एसोसिएशन ने गृह मंत्रालय, एसएसबी, डीआरआई, सीमा शुल्क, वाणिज्य मंत्रालय, डीजीएफटी, विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर नेपाल के रास्ते आने वाले चीनी अखरोट की खेप रोकने और उसकी जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही सीमा पर निगरानी बढ़ाने, हर खेप में अखरोट किस देश का है और उसके साथ जरूरी कागज हैं या नहीं, इसकी जांच कड़ी करने को कहा गया है। चीन से अखरोट लाने के लिए पौधों और फसल से जुड़ी कोई जरूरी मंजूरी है या नहीं, इसकी जानकारी देने और ऐसे माल से सरकार को हुए आयात शुल्क के नुकसान का पता लगाने की भी मांग की गई है। साथ ही इस मुद्दे को भारत-नेपाल संयुक्त कार्य समूह की अगली बैठक में उठाने को कहा गया है।
नेपाल सीमा और मुंबई में पकड़ा जा चुका है चीनी अखरोट
नेपाल के रास्ते चीनी अखरोट भारत आने का एक मामला इसी साल पकड़ा भी जा चुका है। दो जुलाई को उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में सोनौली सीमा पर एसएसबी की 22वीं वाहिनी ने नेपाल से भारत लाया जा रहा 330 किलो चीनी अखरोट पकड़ा था। 33 बोरियों में रखे इस माल की हर बोरी में 10 किलो अखरोट था। एसएसबी को देखकर माल ला रही महिलाएं बोरियां छोड़कर नेपाल की ओर भाग गईं। 23 फरवरी, 2026 मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर चीन के 46 कंटेनर अखरोट को अफगानिस्तान का माल बताकर शुल्क में 50 करोड़ रुपये की छूट लेने की कोशिश का मामला भी सामने आ चुका है।