अंतर्राष्ट्रीय सीमा से नेशनल हाईवे तक के दरियाई रूट आतंकी और आपराधिक गतिविधियों के लिए मुफीद बनते जा रहे हैं।
स्थानीय कायदा कानून व्यवस्था के लिए जहां दरियाई नालों का रूट पशु तस्करी की वजह से समस्या बनता रहा है, वहीं आतंकी घुसपैठ के लिए भी यही दरियाई नाले इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं।
पिछले कई वर्षों से दरियाई नालों के ये रूट कानूनी व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे हैं, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से दरियाई नालों पर स्थानीय निगरानी तंत्र को अब तक बहाल नहीं किया गया है।
कठुआ जिले में हाईवे और भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा को आपस में जोड़ने वाले दरियाई नालों में शाप नाला, तरनाह नाला, भाग नाला, बसेरा खड और उज्ज दरिया मुख्य हैं।
दरियाई नालों का यह रूट चूंकि पूरी तरह से सुरक्षा घेरे में नहीं रहता लिहाजा आतंकियों से लेकर तस्करों की आवाजाही का सिलसिला गाहे बगाहे आगे बढ़ता रहा है।
इसके लिए कई दफा दरियाई नालों में स्थाई नाके स्थापित करने की कवायद चलाई गई लेकिन व्यवस्था अस्थाई होकर रह गई। नतीजतन कभी तस्करों के लिए यह रूट ढाल का काम करते हैं तो कभी आतंकियों के लिए।
पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दरियाई नालों में अमूमन तलाशी अभियान चलाया जाता है। लेकिन स्थाई चौकियां और पर्याप्त नफरी तैनात करने में सफलता नहीं मिल पाई है।
भौगोलिक रूप से दरियाई नालों में घना जंगल और झाड़ियां होने की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को पहले से बेहतर किया जा रहा है।