संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नासिक में आर्मी के कॉम्बैट एविएटर्स कोर्स में प्रदेश का नाम चमका कर शहर की बेटी सोमवार को घर पहुंचीं। कैप्टन हंसजा रश्मि शर्मा को कठोर उड़ान और जमीनी प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा। देश सेवा का जुनून, जोश और मंजिल ने उन्हें सिल्वर चीता ट्रॉफी (सीएटीएस) दिला दी। इसके साथ ही वह कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल (कैट्स) के इतिहास में यह सम्मान हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी बन गईं।
रिहाड़ी की 24 वर्षीय युवा जांबाज को सम्मान तीन दिन पहले मिला था। एक साल का प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए हंसजा ने बताया कि शारीरिक और मानसिक यात्रा कठिन रही लेकिन दोनों ही रूपों में बहुत मजबूत बन गईं। अब लगता है कि हेलिकॉप्टर हर मुश्किल की घड़ी में लेकर जाकर लोगों की मदद कर सकती हूं। कोर्स में यहीं सीखा है। शुरुआत में सोचती थी कि जीत जाउंगी, लेकिन बीच में कई बार टूटीं और कहने लगी कि जिस लायक हूं उसका सम्मान मिले। पूरे सफर में किसी का साथ होना जरूरी था, उसके लिए मां रशिम शर्मा की भूमिका खास रही। उन्होंने मनोबल टूटने नहीं दिया।
जब ट्रॉफी मिली तो मां का नाम पहले रखा, इसलिए अब कैप्टन हंसजा रश्मि शर्मा से पहचाना जा रहा है। यह गर्व की बात है, जब लोग मुझे उसी नाम से बुलाने लगे तो लगा कि वो हासिल किया जिसका सपना बचपन में देखा था। कौन कहता है कि लड़के ही माता-पिता का नाम रोशन कर सकते हैं, लड़कियां चाहे सुनहरे अक्षरों से लिख सकती हैं। मां का नाम आगे रख कर लोगों को यह बताने की कोशिश की है कि शादी के बाद भी बच्चे चाहें तो मां का नाम हमेशा रह सकता है।
वहीं, रश्मि शर्मा ने कहा कि बच्चियों को विदा करना चाहिए, पर शादी से पहले बेटी आत्मनिर्भर होनी जरूरी है। जब बेटी घर आती है तो सब खुशी देना चाहती हूं जो वह महसूस करती है।