कठुआ। जम्मू-कश्मीर राजभाषा बिल में पंजाबी को शामिल न करने पर कठुआ में सिख समुदाय का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। सिख समुदाय के लोग पंजाब को राजभाषा बिल में शामिल करने की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए विरोध-प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। उल्लेखनीय कि बीते दिनों केंद्रीय कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर राजभाषा बिल को मंजूरी दी है। इसमें जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी, डोगरी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी राजभाषा बनाने का प्रस्ताव है। वहीं, सिख समुदाय की पंजाबी भाषा को भी जम्मू-कश्मीर की राजभाषा की सूची में शामिल करने की मांग है।
मंगलवार को कठुआ के हटली मोड़ में जम्मू-कश्मीर सिख काउसिंल के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे सिख समुदाय के समर्थन में कई राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह अल्पसंख्यक विरोधी निर्णय है। इसमें भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में शामिल कई मंत्री भी पंजाबी भाषा के खिलाफ इस कदम के लिए बराबर जिम्मेदार हैं। इससे लाखों पंजाबी भाषी लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा कि पूरे देश में पंजाबी भाषी लोगों में आक्रोश है। पंजाबी न केवल पंजाब की मुख्य भाषा है, बल्कि इसे कनाडा और ब्रिटेन में भी मान्यता प्राप्त है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिस प्रकार जम्मू-कश्मीर में पांच भाषाओं में स्थानीय भाषाओं कश्मीरी, डोगरी के साथ ही हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू को रखा गया है, उसी प्रकार पंजाबी को भी जम्मू कश्मीर राजभाषा में शामिल किया जाए, नहीं तो उग्र प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।