अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। विकास परियोजनाओं में जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) खुद ही बाधा बन गया। कारण-पहले कब्जे होने दिए, घर बसा दिए, आबादी बढ़ी तो कार्रवाई का विरोध शुरू हो गया। जब भी टीम की ओर से एक्शन प्लान बनाया गया तो मायूसी के सिवाए कुछ नहीं मिला। इसके जिम्मेदार विभागीय अधिकारी और आलाधिकारी हैं, जिन्होंने समय की नजाकत को न समझते हुए अपनी ड्यूटी कार्यालयों में देनी जारी रखी। इस कारण अब भूमि को अतिक्रमण मुक्त करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
दरअसल, 1993 में सिद्दड़ा में जेडीए ने भूमि अधिग्रहण की थी। उस दौरान पूरी जमीन पर 30 हजार के करीब आबादी थी, जो अनदेखी और लापरवाही के कारण बढ़ती गई। 30 साल बाद अब पांच हजार कनाल भूमि अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई। लगभग तीन लाख के करीब लोगों ने घर बना लिए, जिस वजह से इन्हें यहां से हटा पाना मुश्किल है। अगर जेडीए शुरू में ही कोई प्रोजेक्ट चलाता तो आज स्थिति कुछ और होती। विकास के साथ जनसुविधाओं का विस्तार होता। मगर ऐसा कुछ नहीं हो पाया। जेडीए ने 2018 में अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की थी। उस दौरान भारी पथराव हुआ, पर जेसीबी चलती रही। 200 कनाल भूमि अतिक्रमण मुक्त करवाई गई थी, लेकिन वह भी कुछ दिनों में फिर कब्जे की भेंट चढ़ गई।
हाउसिंग कॉलोनी, पार्क समेत अन्य काम लटके
2014 से अब तक जेडीए ने छह बड़ी परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव बनाकर सचिवालय भेजे, जिन्हें समय-समय पर मंजूरी मिलती रही। कब्जों के कारण हाउसिंग कॉलोनी, पार्क, दुकानें, पार्किंग, पार्क कम जलक्रीड़ा के अलावा पिकनिक स्पाट का काम नहीं हो सका। लोगों के विरोध के बीच सभी परियोजनाएं ठप पड़ गईं। 2021 में भी अतिक्रमण हटाने के लिए टीम गई, मगर लोगों के रोष के आगे बैरंग लौट आई। इसके बाद किसी ने भी वहां जाने की जहमत नहीं उताई। जेडीए के अनुसार लोगों को समय-समय पर नोटिस जारी किए गए। अब विभागीय कार्रवाई अमल में लाएगी और प्रोजेक्टों का काम आरंभ किया जाएगा। काम पूरा होने के बाद लोगों को सुविधा मिलेगी। इलाका भी विकसित होगा।
पर्यटन की दृष्टि से होना था विकास
इलाके को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट अमल में लाए जाने थे। काम होने के बाद शहरवासियों और दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को अनुकूल माहौल मिलना था। पार्क, जलक्रीड़ा स्थल, कॉमर्शियल दुकानें बनने से पर्यटकों की संख्या में इजाफा होना था। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर खुलने थे, पर अतिक्रमण के आगे पूरी प्लानिंग धरी की धरी रह गई।
परियोजनाओं का काम शुरू करवाया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की जाएगी। इलाके को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।
- शिव कुमार, वाइस चेयरमैन, जेडीए