आज दुनिया भर में विश्व संग्रहालय दिवस मनाया जा रहा है। 18 मई 1983 को संयुक्त राष्ट्र ने संग्रहालय की विशेषता एवं महत्व को समझते हुए इस दिवस को मनाने का फैसला लिया था। जम्मू संभाग के एक मात्र संग्रहालय डोगरा आर्ट म्यूजिम में कलाकृतियां कैद में हैं। इसका कारण संग्रहालय में पर्याप्त जगह का नहीं होना है।
7500 से अधिक कलाकृतियों के भंडार वाले डोगरा आर्ट म्यूजिम में सिर्फ दो से तीन हजार कलाकृतियां ही प्रदिर्शत हो पा रही हैं, जबकि चार से पांच हजार कैद में हैं। इसका कारण डोगरा आर्ट म्यूजिम का जीर्णोद्धार समय पर नहीं होना है।
18 अप्रैल 1954 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने डोगरा आर्ट संग्रहालय का उद्घाटन किया था। 69 साल बाद 2020 में संग्रहालय को जीर्णोद्धार करने का फैसला लिया। इसके चलते म्यूजिम को मुबारक मंडी परिसर में ही सेना मुख्यालय भवन में स्थानांतरित किया गया। स्थानांतरण के तीन साल बाद संग्रहालय के जीर्णोद्धार के नाम पर सिर्फ छत का कार्य ही शुरू हो पाया है।
इस कारण सिर्फ 30 प्रतिशत कलाकृतियां ही प्रदर्शित हो पा रही हैं। वर्तमान में सेना मुख्यालय भवन में चल रहे संग्रहालय में कुल नौ गैलियरां हैं, जिसमें सिर्फ दो से तीन हजार तक कलाकृतियां ही प्रदिर्शत हो पा रही हैं। संग्रहालय प्रबंधन समय-समय पर कलाकृतियां को बदलता है ताकि युवा पीढ़ी के साथ पर्यटक डुग्गर प्रदेश की संस्कृति से रूबरू हो सके। डोगरा आर्ट म्यूजिम का जीर्णोद्धार होने से प्रदिर्शत होने वाली कलाकृतियों की संख्या बढ़ेगी।
समय-समय पर सामग्री बदल देते हैं : डॉ. संगीता
सहायक निदेशक पुरातत्व अभिलेखागार एवं डोगरा संग्रहालय डॉ. संगीता शर्मा ने कहा कि संग्रहालय में कलाकृति को काफी हैं, लेकिन जगह की कमी है। हालांकि, समय-समय पर सामग्री बदली जाती है। उन्होंने कहा कि डोगरा आर्ट संग्रहालय जम्मू-कश्मीर विशेष कर जम्मू की समृद्ध विरासत को बयां करता है। हमारे पास बसोहली लघु चित्रकला, जम्मू चित्रकला, कांगड़ा चित्रकला की कलाकृतियां हैं। इसके साथ दुर्लभ पांडुलिपियां हैं। डोगरा आभूषण सहित अन्य सामग्री हैं।