राज्य सरकार के कानून सचिव की गाड़ी रोकना और दुर्व्यवहार करना एसएचओ को महंगा पड़ गया। कुछ ही देर बाद उन्हें तबादले की सजा सुना दी गई। वीरवार को नागरिक सचिवालय के बाहर अधिकारी की गाड़ी रोकने पर हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना सुबह करीब 9:55 की है जब मुख्यमंत्री का काफिला उनके आवास से नागरिक सचिवालय की ओर आ रहा था।
प्रोटोकॉल के अनुसार काफिले के करीब आने से 4 से 5 मिनट पूर्व हमेशा की तरह ट्रैफिक को रोका गया लेकिन इतने में कानून सचिव मोहम्मद अशरफ मीर अपनी सरकारी गाड़ी से नागरिक सचिवालय की ओर बढ़ने लगे।
इस पर वहां खड़े ट्रैफिक पुलिस के जवान ने उन्हें रोका। मीर का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस का जवान जब तक ड्राइवर से पूछताछ कर रहा था तभी एसएचओ शहीदगंज निस्सार हुर्रा मौके पर पहुंच गए। उन्होंने कार की चाभी कब्जे में कर ली फिर ड्राइवर को जबरन उतार दिया।
इसके बाद वे कार खुद ही ड्राइव करने लगे। पहले लाल चौक और फिर करन नगर की ओर गाड़ी ले गए। पूछने पर बताया कि कु छ ही देर में पता चल जाएगा कि कहां जा रहे हैं। वह कार लेकर शहीदगंज थाने पहुंच गए।
पुलिस स्टेशन के बाहर कार से उतारने के बाद वह कार थाने में लेते गए। उन्होंने बताया कि इसके बाद सचिवालय से वाहन मंगाकर वे पहुंचे तथा गृह सचिव से उन्होंने विरोध दर्ज कराया।
मामले ने इतना तूल पकड़ा कि एसएचओ शहीदगंज निस्सार हुर्रा के तबादले का आर्डर (आर्डर नंबर 2721/2015 तिथि 17-9-2015) जारी कर दिया गया। उन्हें श्रीनगर पुलिस लाइन भेजा गया है।