जम्मू के आलीशान राजमहलों के भीतरी भाग में पर्यटन विभाग द्वारा संरक्षित करीब साढ़े तीन सौ साल पहले निर्मित ऐतिहासिक शिवनाभ मंदिर आज भी शिव आस्था का द्वार है। आकर्षक चांदी की जलैरी में ग्यारह शिवलिंग स्थापित हैं। यहां रोजाना पूजा होती है। बताया जाता है कि इसकी स्थापना महाराजा गुलाब सिंह ने कराई थी।
मुबारक मंडी के पिंक महल में स्थित डोगरा संग्रहालय के साथ महल के दरवाजे के अंदर जाते ही इसके भीतरी भाग में शिवनाभ मंदिर स्थित है। वर्तमान में यहां महाशिवरात्रि की तैयारियां चल रही हैं। महाशिवरात्रि की विशेष पूजा करने के लिए यहां पर धर्मार्थ ट्रस्ट की ओर से पंडित आचार्य पहुंचते हैं। मंदिर में श्रीयंत्र स्थापित है वहीं, लघु शिवलिंग चांदी के पत्रों से जड़े गए हैं।
मंदिर के भीतरी भाग में प्राचीन चित्रकारी भी है। उल्लेखनीय है कि इस शिवनाभ मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। मन्नत पूरी होने पर यहां धूमधाम से खुशियां मनाई जाती हैं। पर्यटन विभाग ने प्रचार प्रसार के लिए शिवनाभ मंदिर के प्रमुख द्वार पर बोर्ड लगा रखा है। मुबारक मंडी हेरिटेज सोसाइटी की ओर से महलों का जीर्णोद्धार का काम भी कराया जा रहा है।
नेपाल से लाए गए शालीग्राम
पंडित संदीप कुमार का कहना है कि प्राचीन शिवनाभ मंदिर जम्मूवासियों व शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर का नाम शिवनाभ के रूप में रखा गया क्योंकि यहां पर शिवजी की नाभि से उत्पन्न विष्णु यानी शालीग्राम स्थित है। शिवनाभ शालीग्राम को नेपाल से लाया गया था।
शालीग्राम लघु रूप में है, जिसकी आकृति में नाभि व शालीग्राम पिंडी रूप में है। मंदिर के पीछे ही डोगरा महाराजाओं के कुल देवताओं के मंदिर भी हैं। शिवनाभ मंदिर को स्वर्ण पत्र से सजाया गया है। इसी के अंदर चांदी के सिंहासन पर भगवान शिवनाभ की पूजा की जाती है। चांदी की मूर्तियों के साथ ऋषि मार्कंडेय की भी मूर्ति यहां रखी गई है।