प्रदेश में 31 मार्च से 30 अप्रैल तक न शहनाई गूंजेगी और न ही मांगलिक कार्य होंगे। 30 मार्च को सुबह 6:24 बजे पश्चिम में गुरु तारा अस्त हो गया। 30 अप्रैल रविवार सुबह 3:19 बजे गुरु तारा पूर्व में उदय होगा।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु और शुक्र तारा उदय होने पर ही मांगलिक कार्य और विवाह होते हैं। ऐसे में अब 30 अप्रैल के बाद ये शुभ कार्य होंगे। महंत रोहित शास्त्री के अनुसार तारा उदय होने के बाद विवाह का पहला मुहूर्त दो मई को है।
खगोल के मुताबिक सूर्य पृथ्वी के सबसे नजदीक का तारा है जो अपने ही प्रकाश से चमकता है। अन्य ग्रह सूर्य के प्रकाश से ही प्रकाशित होते हैं। भारतीय ज्योतिष में गुरु एवं शुक्र ग्रह को तारा माना गया है।
30 अप्रैल के बाद विवाह मुहूर्त
मई में ये तिथियां हैं: 2, 3, 10, 11, 12, 13, 16, 20, 21, 22, 26, 27, 28, 29, 30 और 31 मई
जून में : 1, 3, 5, 6, 7, 8, 11, 12, 13, 23, 26, 27 और 30 जून
जुलाई में : 1, 2, 3, 6, 9,10,13 और 14 जुलाई
अगस्त में : 24, 26, 28 और 29 अगस्त
सितंबर में : 6, 7, 8, 20, 21, 22, 23, 24, 25 और 26