तवी किनारे महा शिव-पार्वती अमर मंदिर
की महिमा से पिछले बाइस सालों से शिव भक्त परिचित हो रहे हैं। इस मंदिर को
शीशमहल शिव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 1992 में प्रतिष्ठित इस
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान नर्मदेश्वर करीब तीन फीट ऊंचे शिवलिंग के
रूप में स्थापित हैं।
यहां शिव-पार्वती की संगमरमर की प्रतिमा सभी
को आकर्षित करती हैं। यहां की शिव परिवार की सभी प्रतिमाएं जयपुर से मंगवाई
गई हैं, जबकि नर्मदा से शिवलिंग को मंगवाया गया था जिसे महा शिवरात्रि पर
ही स्थापित किया गया था। तभी से शिव भक्तों का केंद्र यह महादेव मंदिर बना
हुआ है।
मंदिर में महा शिवरात्रि की तैयारियां जोरों पर हैं। सजावट
में कारीगर लगे हुए हैं। महा शिवरात्रि आते ही यहां भक्तों की संख्या बढ़
रही है। महा शिवरात्रि पर यहां चार चरणों में पूजा अर्चना की जाती है।
अमरनाथ यात्रा के दौरान यहां भक्तों की संख्या बढ़ जाती है।
साधु
संत जो अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं, उनके ठहरने का इंतजाम भी यहां होता है।
नया मंदिर होने के बावजूद इस मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है। शीश महल
शिव मंदिर के रूप में इसकी पहचान इसलिए है कि मंदिर के गर्भगृह के भीतरी
भाग में कलात्मक ढंग से रंग बिरंगे शीशे को जड़कर कई देवी-देवताओं की
आकृतियां हैं।