महिलाओं के लिए राजनीति में आरक्षण यानी नारी शक्ति वंदन विधेयक 2023 ने महिलाओं की तरक्की के रास्ते खोल दिए हैं। बिल के मुताबिक लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जाएगा। शहर की प्रबुद्ध वर्ग की महिलाओं का कहना है - सपनों को उड़ान मिलेगी। परिवार के साथ राज्य और देश के संचालन में उनकी अहम भूमिका होगी।
लोकसभा की 543 सीटों में से 181 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह आरक्षण आगामी 15 साल तक रहेगा। इसके बाद संसद चाहे तो इसकी अवधि बढ़ा सकती है। आरक्षण सीधे चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए लागू होगा। यानी राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषद दायरे में नहीं आएंगी।
वूमेन सेल की लीगल एडवाइजर मीनाक्षी का कहना है कि दो तिहाई बहुमत से महिला आरक्षण बिल पास हो गया, लेकिन तकनीकी पेंच होने के चलते कानून के लागू होने में समय लग जाएगा। 40 साल के बाद सपने पूरे तो हो गए हैं, लेकिन इंतजार करना पड़ रहा है। व्यवसायी पूजा कपूर का कहना है-देश और महिलाओं के लिए बिल की ज्यादा जरूरत थी। नारी शक्ति वंदन विधेयक युग बदलने वाला है।
इसमें राजनीतिक महिलाओं की बेहतरीन तस्वीर निर्वाचित सदन में दिखेगी। बालिका हायर सेकेंडरी स्कूल की उप प्रधानाचार्य मोनिका कनुप्रिया का कहना है - जिस प्रकार से महिला एक नहीं, दो परिवारों की जिम्मेदारी उठाती है, उसी तरह देश संचालन में महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। विधेयक के पारित होने से महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। पूर्व डिप्टी मेयर पूर्णिमा शर्मा का कहना है कि दशकों से लंबित महिला आरक्षण विधेयक को नारी शक्ति वंदन विधेयक का नाम देकर सम्मान मिला है। एडवोकेट निधि मंगोत्रा का कहना है कि महिलाओं को मंच मिल गया है।
डीसी ऑफिस के निकट रहने वाली समाजसेवी अनु गुप्ता का कहना है-सही मायने में मोदी सरकार ने महिलाओं को हक दिलाया है। त्रिकुटा नगर की डॉ. मिताली गुप्ता का कहना है कि लंबी जद्दोजहद के बाद नारी शक्ति वंदन विधेयक लोकसभा में पारित हुआ। यह महिलाओं के उत्थान के लिए मील का पत्थर साबित होगा।