श्रीनगर लोकसभा सीट पर पुनर्मतदान से एन पहले सात उम्मीदवारों ने चुनाव बहिष्कार का एलान कर हड़कंप मचा दिया है। सातों उम्मीदवारों ने बुधवार को यहां संयुक्त पत्रकार वार्ता में 38 पोलिंग बूथों पर पुनर्मतदान के फैसले का कड़ा विरोध करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर एतराज जताया।
उन्होंने कहा, वे अपने भाईयों को मरने नहीं देना चाहते हैं। अवाम को चाहिए कि वह मूर्ख बनाने की इस प्रक्रिया का हिस्सा न बनें और अपने घरों में रहकर उपचुनाव का बहिष्कार करें। सात उम्मीदवारों में शामिल राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी के मिर्जा सजाद हुसैन बेग, अखिल भारतीय हिंदू महासभा से चेतन शर्मा, राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी (सेकुलर) से इंजीनियर सजाद रेशी, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी से बिक्रम सिंह, निर्दलीयों में फारूक अहमद डार, गुलाम हसन डार और महराज रशीद मलिक ने पुनर्मतदान के फैसले को एकतरफा बताया।
मिर्जा सजाद ने कहा, 38 पोलिंग बूथों पर पुनर्मतदान कराने के फैसले को लेकर उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। इस मामले पर उन्होंने रिटर्निंग आफिसर और मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात करने की कोशिश की लेकिन अधिकारी अपने दफ्तरों में मौजूद नहीं थे। मिर्जा सजाद ने कहा, यह इलेक्शन नहीं सिलेक्शन है। अवाम को मूर्ख बनाया जा रहा है।
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उन्होंने कहा, 9 अप्रैल को श्रीनगर उपचुनाव में जो कुछ हुआ, उसके बाद वे उपचुनाव में शामिल होकर अपने भाईयों को नहीं मार सकते। कहा कि अनंतनाग उपचुनाव को माहौल खराब होने के तर्क पर टाल दिया गया है तो श्रीनगर में भारी हिंसा के बावजूद पुनर्मतदान का फैसला कैसे उचित हो सकता है।
संयुक्त बयान में उम्मीदवारों ने कहा, सरकार कश्मीरियों की जान का जोखिम लेकर पुनर्मतदान करवा रही है। इससे भारतीय निर्वाचन आयोग की वैधता पर सवाल उठना लाजमी हैं, क्योंकि अनंतनाग उपचुनाव को टालने का फैसला पीडीपी के उम्मीदवार के अनुरोध पर लिया गया है।
जम्मू में प्रदर्शनकारियों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा, कश्मीर में प्रदर्शनकारियाें पर गोलियां बरसाई जाती हैं। यह केंद्रीय सरकार की कश्मीर नीति को उजागर करता है। मालूम हो कि श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव के लिए पीडीपी और नेकां के उम्मीदवारों समेत कुल नौ प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें से सात ने चुनाव बहिष्कार का एलान कर दिया है।