बंद के दौरान सुरक्षाबलों पर पथराव करते पत्थरबाज
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अलगाववादियों के बंद के आह्वान से मंगलवार को घाटी में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। सभी स्कूल, कॉलेज समेत दुकानें और अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान भी बंद रहे। बैंकों और सरकारी दफ्तरों में हाजिरी कम देखने को मिली। सड़कों पर से यातायात भी गायब रहा। श्रीनगर तथा बडगाम में बुधवार को भी स्कूल कालेज बंद रहेंगे।
श्रीनगर के पुराने शहर में प्रशासन ने हालात की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पाबंदियां लगाई थी। सभी संवेदनशील इलाकों में जवानों की अतिरिक्त तैनाती भी की गई थी। इस बीच दक्षिणी कश्मीर में हालात बहुत ज्यादा तनावपूर्ण देखने को मिले। यहां बंद का काफी ज्यादा असर रहा। उत्तरी और मध्य कश्मीर से भी ऐसी ही खबरें मिली।
दरअसल अलगाववादी नेता गिलानी, मीरवाइज और यासीन मलिक के ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) ने बंद की कॉल दी थी, जिसे ध्यान में रखते हुए गिलानी, मीरवाइज और यासीन मलिक को पहले से ही नजरबंद कर दिया गया है। रविवार को दक्षिणी कश्मीर में 13 आतंकियों और चार स्थानीय लोगों के मारे जाने के विरोध में बंद का आह्वान किया गया था। इस दौरान सेना के तीन जवान भी शहीद हुए थे जबकि 100 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। दक्षिणी कश्मीर को छोड़कर घाटी में 48 घंटों के बाद मंगलवार को हाई स्पीड इंटरनेट से प्रतिबंध हटाया गया है। बंद से रेल सेवा भी प्रभावित हुई हैं।
शोपियां चलो कॉल से सुरक्षा कड़ी
जेआरएल की ओर से बुधवार को शोपियां चलो की कॉल दी गई है। इसके मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। बारामुला और शोपियां जिले में स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया गया है। कश्मीर यूनिवर्सिटी ने भी बुधवार को होने वाली परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। साथ ही कक्षाएं बंद रखने की घोषणा की है।