जम्मू। कृषि के प्रति युवाओं की उदासीनता और ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन मुख्य चुनौती बन गया है। कृषि क्षेत्र में रोजगार की अपास संभावनाएं हैं, जिसके लिए युवाओं का आगे आना होगा। यह बातें स्कॉस्ट जम्मू में बुधवार को शुरू हुई दो दिवसीय फार्म इकोनामी ऑफ हिमालयन रिजीन विषय पर कार्यशाला के शुभारंभ मौके पर वीसी जेपी शर्मा ने कही। इसका आयोजन एग्रीकल्चर इकोनामिक्स एंड एग्री बिजनेस मैनेजमेंट स्कॉस्ट जम्मू और इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रीकल्चर इकोनामिक्स मुंबई की ओर से करवाया जा रहा है।
वीसी ने कहा कि खेती के लिए पानी की कमी मुख्य चुनौती बन रही है, जिसके समाधान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खेती के लिए भूमि की उपलब्धता घट रही है। अब कृषि उपज की बर्बादी को रोकना होगा। उन्होंने किसानों को सशक्त बनाने के लिए एफपीओ और सहकारी समितियों को बढ़ावा देने को कहा। साथ ही कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, अपशिष्ट प्रबंधन, मूल्यवर्धन और विपणन पर जोर दिया। भारतीय कृषक समाज के अध्यक्ष डा. कृष्ण बीर चौधरी ने कहा कि खेती से आर्थिक सुदृढ़ होती है। इसमें रुचि लेकर काम किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि जम्मू-कश्मीर का एक बड़ा क्षेत्र जैविक प्रकृति का है और समय की आवश्यकता है कि इन क्षेत्रों को बड़े क्षेत्र में जैविक प्रमाणीकरण प्रदान किया जाए। इसमें 56 डेलीगेटस ने आनलाइन मोड से कार्यशाला में हिस्सा लिया और अपने विचार रखे।