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जम्मू-कश्मीर: उरी में संदिग्ध गतिविधि देख सुरक्षाकर्मी ने की फायरिंग, सेना ने चलाया तलाशी अभियान

Mon, 11 Feb 2019 09:18 AM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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- फोटो : अमर उजाला
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उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती जिले बारामुला के उड़ी सेक्टर में सेना के कैंप के बाहर सोमवार तड़के संदिग्ध हरकत देखने पर संतरी ने फायरिंग की। इसके बाद पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों का तलाशी अभियान जारी है।
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सूत्रों के अनुसार कुछ सप्ताह पूर्व खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले थे कि अफजल गुरु और मकबूल भट (9 और 11 फरवरी) की बरसी पर आतंकियों का अफजल गुरु स्क्वायड किसी बड़े हमले को अंजाम दे सकता है। इस इनपुट के बाद उड़ी और आस-पास के सभी इलाकों में स्थित सैन्य व अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

उड़ी सेक्टर के रजरवानी इलाके में स्थित सेना के 326 आर्टिलरी यूनिट के करीब एक नाले के पास सोमवार सुबह करीब चार बजे दो लोगों की संदिग्ध हरकत देखने को मिली। इसके तुरंत बाद गेट पर तैनात संतरी ने ताबड़तोड़ कई राउंड फायरिंग की। इस बीच अन्य जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए उस ओर ताबड़तोड़ फायरिंग करनी शुरू कर दी।
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इस बीच यह खबर फैली कि सेना के कैंप पर आतंकी हमला हुआ है। यह कैंप मोहरा पावर प्रोजेक्ट से करीब एक किलोमीटर दूरी पर स्थित है। एसएसपी बारामुला इम्तियाज हुसैन ने बताया कि कोई आतंकी हमला नहीं था। केवल सुरक्षा बलों द्वारा वार्निंग फायर किए गए। इसके बाद से लगातार तलाशी अभियान जारी है। इस ऑपरेशन को सेना की 62 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), 3 और 4 पैरा, बारामुला पुलिस और सीआरपीएफ की 53 बटालियन अंजाम दे रही है।
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पहले भी हो चुके हैं दो आत्मघाती हमले

उड़ी में पहले भी दो बड़े आत्मघाती हमलों को आतंकियों द्वारा अंजाम दिया जा चुका है। पहला हमला पांच दिसंबर 2014 को उड़ी में स्थित सेना के महोर कैंप पर हुआ था जिसमें 10 जवान शहीद हुए थे और 6 आतंकी मार गिराए गए थे। दो वर्ष बाद 19 सितंबर 2018 को सेना की 12 बिग्रेड में हुए आतंकी हमले में 19 जवान शहीद हुए थे और 4 आतंकियों को मार गिराया गया था।
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