घाटी के तीन सियासी नेताओं की सुरक्षा सरकार ने मंगलवार को वापस ले ली है। इनमें पीडीपी के यूथ विंग के अध्यक्ष वहीद-उर-रहमान पर्रा, नौकरशाह से राजनेता बने पूर्व आईएएस शाह फैसल और लंगेट से पूर्व विधायक इंजीनियर रशीद शामिल हैं। हालांकि कि आधिकारिक रूप से इसे लेकर किसी ने पुष्टि नहीं की है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती ने इस कदम को चिंता का विषय बताया है।
नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा, मैं राज्यपाल और पुलिस के शाह फैसल, वहीद पर्रा और इंजीनियर रशीद जैसे नेताओं की सुरक्षा वापस लेने के निर्णय पर अपनी मजबूत आपत्तियों को रिकॉर्ड कराने की इच्छा रखता हूं।
ऐसे समय में जब प्रशासन ने विधानसभा चुनाव कराने से इनकार करने के लिए सुरक्षा वातावरण के बहाने का इस्तेमाल किया है, यह निर्णय और अधिक विचित्र है। उमर ने लिखा, खुदा न करे इन राजनेताओं में से किसी के साथ भी कुछ ऐसा हो तो उसके लिए राज्यपाल सत्यपाल मलिक और उनका प्रशासन जिम्मेदार होगा। उमर ने यह भी लिखा, राज्यपाल और उनके प्रशासन को अच्छी तरह से सलाह दी जाएगी कि एक निष्पक्ष खतरे का मूल्यांकन किया जाना चाहिए और सुरक्षा के निर्णय उन्हीं के आधार पर लिए जाने चाहिए।
चुनाव आयोग से दखल की मांग
पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने ट्वीट कर लिखा, राजनीतिक नेताओं को राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीद, फैसल और इंजीनियर राशिद की सुरक्षा वापस लेना चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है। यह एक तरह का प्री पोल धांधली है। इलेक्शन कमीशन आफ इंडिया (ईसीआई) को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।