सरकारी स्कूलों में लगातार गिरते शिक्षा के स्तर और निजी स्कूलों की मनमानी अभिभावकों के लिए आगे कुआं और पीछे खाई की स्थिति उत्पन्न कर दी है।
चौतरफा महंगाई के बीच मनमानी तरीके से निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी ने अभिभावकों के माथे पर बल डाल दी है। फरवरी से अप्रैल तक स्कूलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस समय परीक्षाओं और फिर एडमिशन का समय होता है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत एनरोलमेंट ड्राइव तब जाकर शुरू होती है, जब सभी निजी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाता है।
ऐसे में मजबूर होकर अभिभावक ही अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में करवाते हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार निजी स्कूल तीन साल में मात्र एक बार ही फीस बढ़ोत्तरी कर सकते हैं, जिसके लिए बाकायदा अभिभावकों की सहमति भी जरूरी होती है, लेकिन हर फीस बढ़ोत्तरी कर दी जाती है।