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J&K: ट्रैफिक पुलिस की ई-चालान मशीन खरीदने में ही हो गया करोड़ों का घोटाला, एसीबी जांच में जुटी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Tue, 29 Jan 2019 12:07 PM IST

सार

  • 200 मशीनें खरीदने की थी योजना, 20 की खरीद में ही घोटाला निकला
  • एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने पुलिस मुख्यालय का रिकार्ड खंगाला
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फाइल
ट्रैफिक पुलिस की खरीदी गई ई चालान मशीनों में घोटाला हुआ है। जम्मू-कश्मीर सरकार के नोटिस में आने के बाद इसकी जांच एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपी गई है। सोमवार को ब्यूरो की टीम ने पुलिस मुख्यालय के स्टाफ से पूछताछ की। कुछ रिकार्ड जब्त करने की भी सूचना है। घोटाले में शामिल सिकाप कंपनी के अधिकारियों से भी पूछताछ हुई है।
 
जानकारी के अनुसार ट्रैफिक पुलिस ने पूरी रियासत में 200 ई चालान मशीनें खरीदनी थी। मशीनें खरीदने के लिए टेंडर किया गया। टेंडर सिकाप कंपनी ने लिया। एक मशीन की कीमत 22 हजार रुपये है, जिसकी खरीद 2.2 लाख रुपये में हुई। अभी 20 मशीनें खरीदी थीं। प्रति मशीन 2.2 लाख रुपये के हिसाब से 40 लाख रुपये में खरीदी गईं। जबकि हकीकत में इनकी कीमत 4 लाख रुपये है। 


कुछ ही दिन पहले इन मशीनों को लांच किया गया था। सूत्रों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने जब उक्त मशीन की कंपनी और इसके फीचर को गुगल पर सर्च किया तो उसकी कीमत 22 हजार रुपये निकली। इसकी जानकारी जब आगे बढ़ी तो घोटाले का पर्दाफाश हुआ। 
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फाइल
ट्रैफिक पुलिस की खरीदी गई ई चालान मशीनों में घोटाला हुआ है। जम्मू-कश्मीर सरकार के नोटिस में आने के बाद इसकी जांच एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपी गई है। सोमवार को ब्यूरो की टीम ने पुलिस मुख्यालय के स्टाफ से पूछताछ की। कुछ रिकार्ड जब्त करने की भी सूचना है। घोटाले में शामिल सिकाप कंपनी के अधिकारियों से भी पूछताछ हुई है।
 
जानकारी के अनुसार ट्रैफिक पुलिस ने पूरी रियासत में 200 ई चालान मशीनें खरीदनी थी। मशीनें खरीदने के लिए टेंडर किया गया। टेंडर सिकाप कंपनी ने लिया। एक मशीन की कीमत 22 हजार रुपये है, जिसकी खरीद 2.2 लाख रुपये में हुई। अभी 20 मशीनें खरीदी थीं। प्रति मशीन 2.2 लाख रुपये के हिसाब से 40 लाख रुपये में खरीदी गईं। जबकि हकीकत में इनकी कीमत 4 लाख रुपये है। 

कुछ ही दिन पहले इन मशीनों को लांच किया गया था। सूत्रों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने जब उक्त मशीन की कंपनी और इसके फीचर को गुगल पर सर्च किया तो उसकी कीमत 22 हजार रुपये निकली। इसकी जानकारी जब आगे बढ़ी तो घोटाले का पर्दाफाश हुआ। 

बच गए करोड़ों
अभी तो 20 मशीनें खरीदी गईं। इनकी पेमेंट भी हो गई। यदि 200 मशीनें खरीदी जाती तो इसके लिए सरकार के 4 करोड़ खर्च होते। हकीकत में 200 मशीनें 40 लाख रुपये में ही आ जानी हैं। अभी से घोटाले का पता लगने से सरकार के करोड़ों रुपये बचे हैं।

नपेंगे कई अधिकारी
घोटाले में पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों से लेकर नीचले स्तर तक के कर्मियों के इस घोटाले में शामिल होने की सूचना है। सोमवार को एंटी करप्शन ब्यूरो ने पुलिस मुख्यालय में पहुंचकर इसकी जानकारी जुटाई। कुछ अधिकारियों से पूछताछ की गई। सिकाप के अधिकारियों से भी पूछताछ हुई है। 
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