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Jammu News: सावलकोट प्रोजेक्ट का काम दोबारा शुरू हो, रियासी बने केंद्र

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विनीत शर्मा। 
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रियासी। सिंधु जल संधि के रद्द होने और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सावलकोट प्रोजेक्ट का काम दोबारा शुरू करने के बयान के बाद रियासी में इस प्रोजेक्ट के लिए हलचल शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सावलकोट प्रोजेक्ट का काम दोबारा शुरू हो, लेकिन इसका केंद्र रियासी होना चाहिए।
बता दें कि मुख्यमंत्री ने बयान में कहा है कि वर्ष 1984 में उनके पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने यह प्रोजेक्ट शुरू करवाने का काम किया था। जिससे प्रदेश में बिजली का उत्पादन और ज्यादा होना था। प्रोजेक्ट का काम नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की तरफ से करवाया जाना था लेकिन पाकिस्तान के अड़ंगा डालने के बाद यह काम आज तक पूरा नहीं हुआ। अब जब सिंधु जल संधि समझौता समाप्ति पर है तो इस प्रोजेक्ट को शुरू करवाया जाना चाहिए।
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कोट..

लोगों को लाभ मिलेगा सरकार का पैसा भी बचेगा

हम मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान का स्वागत करते हैं। प्रोजेक्ट को शुरू करवा इसका केंद्र बिंदु सलाल प्रोजेक्ट ज्योतिपुरम की कॉलोनी को रखा जाना चाहिए। वहां पर पहले से ही एनएचपीसी की जगह व अन्य सुविधाएं हैं। इससे लोगों को लाभ मिलेगा सरकार का पैसा भी बचेगा।
- तारिक भट्ट, नेकां नेता
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मुख्य आवाजाही रियासी से करनी चाहिए

सिंधु जल संधि पूरी तरह से समाप्त कर देनी चाहिए। सावलकोट प्रोजेक्ट के काम को दोबारा से शुरू किया जाना चाहिए। जम्मू से वाया उधमपुर रामबन से वहां तक पहुंचना कठिन है इस प्रोजेक्ट का काम शुरू करवा मुख्य आवाजाही रियासी से करनी चाहिए जो सरल व आरामदायक है।
-विनीत शर्मा,,,स्थानीय दुकानदार


रोजगार व व्यापार के साधन बढ़ेंगे

सावलकोट प्रोजेक्ट प्रदेश के किए काफी अहम है। इसके साथ ही अगर इसका काम शुरू कर जिला मुख्यालय या ज्योतिपुरम में ऑफिस बनते हैं तो लोगों को फायदा होगा। युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होने रियासी में भी रोजगार व व्यापार के साधन बढ़ेंगे।
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-मिथुन भारती, प्रधान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स


सावलकोट जाने के लिए रामबन का रास्ता ज्यादा दूर

सलाल प्रोजेक्ट को बनाने का काम सारा ज्योतिपुरम से हुआ। सावलकोट जाने के लिए रामबन का रास्ता ज्यादा दूर है। जिला मुख्यालय से खनिकोट तक मार्ग अब रेलवे निर्माण कार्य के चलते बन गया है। सावलकोट वहां से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। जम्मू से वहां तक दो सौ किलोमीटर का ही रास्ता रह जाएगा। यहां से काम करने में ज्यादा मुश्किल भी नहीं होगी।
विकास पड़ोत्रा,स्थानीय दुकानदार।
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