जम्मू। सद्गुरु की शरण में आने के बाद भक्तों केे शांति की अनुभूति होती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वे माया, काम और क्रोध से दूर हैं। यह ज्ञान साहिब बंदगी पंथ के प्रमुख मधु परम हंस महाराज ने रविवार को सतवारी चौक मैदान में आयोजित सत्संग में दिया।
उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में बुजुर्ग मन को शांत करने के लिए पीपल के पेड़ की छाया में बैठते थे। क्योंकि पीपल के पत्तों में सूरज की गर्मी को दूर रखने का अद्भुत गुण होता है। जिस तरह पत्तों की मोटाई पेड़ के लिए अनुकूल होती है, वैसे ही एक संत के पास भी एक गुण है जो माया को अपने से दूर रखता है। उसके पास शांति और शीतलता है। जिस प्रकार वृक्ष के पत्ते सूर्य की किरणों को पास नहीं आने देते, वैसे ही संत भी माया के साथ ऐसा ही करते हैं। इसलिए माया से उत्पन्न होने वाले कष्ट उनसे दूर रहते हैं और मन की शांति मिलती है। इसलिए किसी गुरु की अच्छी तरह परख कर उसकी शरण में जाना ही बुद्धिमानी है। हर दुखी व्यक्ति महान आत्माओं की संगति में मन की शांति प्राप्त कर सकता है।