समिति ने परियोजना को श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की
कटड़ा। श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने ताराकोट मार्ग से सांझी छत तक प्रस्तावित रोपवे गंडोला परियोजना के खिलाफ एक अहम बैठक आयोजित की। इसके बाद रोष रैली निकाली गई। समिति ने इस परियोजना को श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और स्थानीय हितों के खिलाफ बताते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की।
बैठक में संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि जब तक उपराज्यपाल द्वारा गठित कमेटी लिखित में यह आश्वासन नहीं देती कि रोपवे परियोजना पूरी तरह बंद की जाएगी, तब तक वे किसी भी वार्ता का हिस्सा नहीं बनेंगे। समिति के सदस्यों का कहना है कि माता वैष्णो देवी यात्रा एक पारंपरिक और आस्था से जुड़ा मार्ग है, जिसे रोपवे जैसी आधुनिक सुविधाओं से बाधित करना अनुचित होगा।
रैली में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पुजारी, व्यवसायी और यात्रा मार्ग से जुड़े विभिन्न संगठनों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की कि वे इस योजना को तत्काल वापस लें और माता के भक्तों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करें।
रात में जारी है रोपवे का कार्य, बढ़ रहा विवाद
संघर्ष समिति का आरोप है कि प्रशासन रात के समय रोपवे परियोजना का कार्य जारी रखे हुए है, जो विवाद की एक बड़ी वजह बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन उसे दरकिनार कर कार्य जारी रखा गया। जनता अब लिखित में ठोस गारंटी चाहती है कि उनकी बात सुनी जाएगी और किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले सभी हितधारकों की सहमति ली जाएगी।
संघर्ष समिति के वरिष्ठ सदस्य बलीराम राणा, राजेश साधोत्रा, सोनू ठाकुर, रवि नाग, प्रभात सिंह मंगली, राकेश वज़ीर, काकु केसर, वरुण मागोत्रा, मानव साधोत्रा, प्रताप शर्मा, करण सिंह, ओमकार सिंह, मानिक परोच और सिद्धांत ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो विरोध और तेज किया जाएगा और बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
अब तक प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है। राज्यपाल द्वारा गठित कमेटी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी उनके विश्वास को तोड़ा गया है। संवाद