नड्ड-सुंब के हजारों छात्रों को कॉलेज का इंतजार
सांबा। जिले के सुंब और नड्ड ब्लॉक में डिग्री कॉलेज न होने से विद्यार्थी उच्च शिक्षा से लगातार वंचित हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पहाड़ों से शहर तक लंबी दूरी बच्चों के करियर में बाधा बनी हुई है। कॉलेज न होने के कारण बड़ी संख्या में बच्चे 12वीं के बाद पढ़ाई नहीं कर पाते।
ग्रामीणों ने बताया कि सुंब और नड्ड ब्लॉक की जनसंख्या 20 हजार है। नड्ड, नई कली, पापड़, मनानु, जांडा, पापड़ अवतारा, कियानी, जमोडा, मुल्थ, सुंब, गोरन, बेई, जीड और हंडड सहित कई गांवों के छात्र नड्ड और सुंब हायर सेकेंडरी स्कूल तक ही सीमित रह जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वर्षों से कॉलेज खोलने की मांग उठाई जा रही है लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई। पहाड़ी इलाके होने के कारण बच्चों को दूर शहरों तक पहुंचना मुश्किल होता है। कई छात्र तो रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर पहले सड़क मार्ग तक पहुंचते हैं और फिर गाड़ियों का सहारा लेकर स्कूल जाते हैं। 12वीं के बाद कॉलेज की दूरी और खर्च दोनों ही अधिकांश परिवारों के लिए भारी पड़ जाते हैं। इसके चलते कई छात्र उच्च शिक्षा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
नड्ड ब्लॉक का बड़ा हिस्सा ऊंची पहाड़ियों पर बसा है। यहां के अधिकतर लोग किसान और मजदूर वर्ग से हैं जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। ऐसे में बच्चों को बाहर शहर भेजकर पढ़ाना संभव नहीं। इसलिए नड्ड और सुंब ब्लॉक के बीच कॉलेज खोला जाना बेहद जरूरी है।
- गोपाल सिंह, स्थानीय निवासी
हम पिछले कई वर्षों से नड्ड ब्लॉक में डिग्री कॉलेज खोलने की मांग कर रहे हैं। हर बार जनप्रतिनिधि आते हैं हमारी बात सुनते हैं और सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं। मगर जमीनी स्तर पर आज तक एक भी ठोस कदम नहीं उठाया गया। पहाड़ी इलाके में रहने वाले बच्चों के लिए रोज शहर जाकर पढ़ाई करना किसी सजा से कम नहीं है। कई बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। सरकार को सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि जल्द निर्णय लेना चाहिए।
- पंकज कुमार, स्थानीय निवासी
हमने पंचायत बैठकों से लेकर बड़े प्रतिनिधियों तक, हर जगह अपनी बात रखी है। मगर हर बार हमें यही कहा गया कि ‘जल्द ही कॉलेज बनेगा’। अब लोग आश्वासनों से परेशान हो चुके हैं। हमारे बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है। जब तक हमारे क्षेत्र में कॉलेज नहीं बनेगा, तब तक यहां के बच्चे आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
- संदीप शर्मा
कोट
कॉलेज खोलने की मांग जायज है और इसे प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा। उपराज्यपाल और जम्मू कश्मीर सरकार के समक्ष भी इस मुद्दे को रखा जाएगा ताकि क्षेत्र के बच्चों को उनके घर के पास ही उच्च शिक्षा की सुविधा मिल सके।
- सुरजीत सिंह सलाथिया, विधायक