दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से मावा में हुआ भजन संकीर्तन
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। समाज का यह दुर्भाग्य है कि भारतीय होने के बावजूद हम पाश्चात्य संस्कृति के अनुसार जीवनशैली को अपना रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप बच्चे माता-पिता का सम्मान नहीं कर रहे हैं और वृद्धाश्रमों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। इसलिए अभिभावक संतान को संस्कार दें और नैतिक मूल्यों के बारे में बताएं। यह ज्ञान दिव्य ज्याति जागृति संस्थान की ओर से मावा में आयोजित भजन संकीर्तन कार्यक्रम में गुरुदेव आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी हरिदासानंद ने दिया।
उन्होंने बताया कि हमारी संस्कृतिक गुरु और माता-पिता का सम्मान करना सिखाती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने जीवन में नैतिक मूल्यों को धारण करने की प्रेरणा दी है। आज समाज को अपने भारतीय संस्कृति के अनुसार उन नैतिक मूल्य व संस्कारों की आवश्यकता है, जिनके अभाव में समाज का स्वरूप विकृत हो रहा है। भारत के पुनरुत्थान के लिए हमें अपने भारतीय संस्कृति की ओर अग्रसर होना होगा। अध्यात्म को अपनाकर ही हम प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को सुंदर संस्कारों से सुसज्जित कर एक सभ्य समाज का निर्माण कर सकते हैं।
आज संतान को संस्कारों से सुसज्जित करने की आवश्यकता है। महात्मा रमन दीप और महात्मा गुरप्रीत के द्वारा सुंदर, सार गर्भित एवं भावपूर्ण भजनों का गायन किया। अंत में संगत ने प्रसाद ग्रहण किया।