जम्मू-कश्मीर के बैंकों में 492 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। जेके बैंक में 331 करोड़, एसबीआई में 77 और पीएनबी में 44 करोड़ अनक्लेम्ड डिपॉजिट हैं।
लोग दावा करने नहीं पहुंच रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के बैंकों में लोगों के 492 करोड़ रुपये अब भी अनक्लेम्ड डिपॉजिट हैं। यह रकम ऐसे खातों में जमा है, जिन पर वर्षों से किसी ने दावा नहीं किया है। लोगों तक यह पैसा पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने तीन महीने तक अभियान चलाया।
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प्रदेश में इसका भी कुछ खास असर नहीं दिखा। 507 करोड़ में से 15 करोड़ रुपये ही वापस लौट सके। केंद्र सरकार ने अनक्लेम्ड डिपॉजिट को वापस करने के लिए देशभर में एक अक्तूबर से 31 दिसंबर, 2025 तक आपकी पूंजी, आपका अधिकार अभियान चलाया।
इसमें रिजर्व बैंक, सेबी, बीमा नियामक और दूसरी वित्तीय संस्थाएं भी शामिल रहीं। बैंकों को पुराने खाताधारकों और उनके परिवारों तक पहुंचने, फोन कॉल और संदेश भेजने के साथ शिविर लगाने को कहा गया था ताकि वर्षों से खातों में पड़ी रकम लोगों तक पहुंच सके।
प्रदेश के बैंकों में कुल 17.89 बैंक खातों में 507.17 करोड़ रुपये अनक्लेम्ड डिपॉजिट के रूप में जमा मिले थे। सभी जिलों में बैंकों ने अभियान चलकर लोगों को दावा करने का आह्वान किया। जिन लोगों ने दावे किए उनको रकम भी वापस लौटाई। हालांकि बड़ी कम संख्या में लोगों ने दावे किए और 15.03 करोड़ की वापस किए जा सके।
आरबीआई के पोर्टल पर ढूंढ सकते हैं अपनी रकम
अगर आपको लगता है कि आपका कोई पुराना खाता, एफडी या दूसरी जमा रकम छूट गई है, तो रिजर्व बैंक के उद्गम पोर्टल पर इसकी जानकारी देखी जा सकती है। इसके लिए पोर्टल पर मोबाइल नंबर से लॉगिन कर नाम और बैंक की जानकारी भरें। अलग-अलग बैंकों में पड़े पुराने खाते खोजें और रकम मिलने पर संबंधित बैंक में दावा करें।
कब अनक्लेम्ड डिपॉजिट माना जाता है पैसा
प्रदेश के लीड बैंक मैनेजर खुर्शीद मुजफ्फर बताते हैं कि किसी बैंक खाते, एफडी, पेंशन, डिविडेंड या दूसरी जमा रकम में लगातार 10 साल तक कोई लेनदेन नहीं होता और उस पर कोई दावा नहीं किया जाता, तो उसे अनक्लेम्ड डिपॉजिट मान लिया जाता है।
ऐसे खाते अक्सर लोगों के भूल जाने, नौकरी या शहर बदलने, खाताधारक की मौत के बाद परिवार तक जानकारी नहीं पहुंचने या नॉमिनी नहीं होने से वर्षों तक पड़े रह जाते हैं। उन्होंने लोगों से आगे आकर अनक्लेम्ड डिपॉजिट पर दावा करने की अपील भी की।