इस बार घाटी में आए जल सैलाब के बाद मनाई गई पहली बकरीद के मौके पर बहुत कम लोग ही बाजारों में खरीदारी के लिए निकले। इसके चलते घाटी के कारोबारियों को 1200 करोड़ का नुकसान हुआ है। यह खुलासा कश्मीर इकोनाेमिक एलाएंस की ओर से जारी रिपोर्ट में किया गया है।
कश्मीर इकोनामिक एलाएंस के अध्यक्ष यासीन खान ने इसकी पुष्टि की है। संगठन ने घाटी में इस बार आए जल सैलाब के चलते कुल 30 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान जताया है। त्योहार पर सामान की खरीदारी के लिए मुश्किल से पांच से दस प्रतिशत लोगों के ही पहुंचे।
राजोरी निवासी बक्करवाल मोहम्मद सादिक के अनुसार वे हर साल ईद के मौके पर बकरे का मीट बेचकर अच्छी कमाई कर लेते थे, लेकिन इस बार उनको काफी नुकसान हुआ है।
सादिक ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने 400 रुपये किलो के हिसाब से बकरे का मीट बेचा था, लेकिन इस बार 220 रुपये किलो के हिसाब से मीट बेचने के बावजूद भी बहुत कम खरीदार ही उनके पास आए। यही हाल दूसरे मीट विक्रेताओं का भी है।
त्योहार के मौके पर तरह-तरह के सामान बेचने वाले विक्रेता खरीदारों की बाट जोहते रहे, लेकिन बहुत कम लोग ही खरीदारी के लिए बाजार पहुंचे।
इसी तरह यासीन ने बताया कि घाटी में सैलाब आने के बाद लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, जबकि सरकार की ओर से पुनर्वास की कोशिशें नाकाफी साबित हुई हैं।
उन्होंने बताया कि लाल चौक पर ट्रेडर्स सरकार से काफी खफा हैं। वे अपनी विभिन्न मांगों के लिए बड़सा पुल पर धरना दे रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने बाढ़ से प्रभावित व्यापारियों की मांगों को पूरा करने के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठाया है।