उधमपुर का रेलवे स्टेशन इन दिनों छत्तीसगढ़ से आए चावलों का गोदाम बन गया है। खुले आसमान में रखे करोड़ों रुपये के चावलों को ढोने के लिए मात्र एक ट्रक लगा हुआ है। जो चावलों को श्रीनगर ले जाएगा। स्टेशन के गुड्स प्लेटफार्म पर अन्य कोई भी चीज रखने की जगह नहीं है। हालांकि चावलों के कुछ ढेर को तिरपाल से ढका गया है।
एक सप्ताह से इन चावलों को स्टेशन पर ही रखा गया है और जिला प्रशासन अभी तक इसे संभाल नहीं पाया है। जो कोई भी स्टोर या खाली जगह थी, उसमें कीचड़ भरे होने के कारण इसे रखा नहीं जा सका। जिन तिरपाल से चावल को ढका गया है, वह भी बाढ़ पीड़ितों के लिए आए थे। विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया के अनुसार लोगों को राहत सामग्री और तिरपाल तक बांटने में प्रशासन असफल रहा है।
जरूरत मंद लोग अब भी खुले आसमान या टूटी-फूटी झोंपड़ियों के नीचे रह रहे हैं। जिला प्रशासन के कुप्रबंधन के कारण ही करोड़ों रुपये के चावल बाढ़ एवं भूस्खलन प्रभावित लोगों तक नहीं पहुंच पाए हैं। लोगों को तिरपाल भी प्रशासन नहीं दे सका है। इसकी मिसाल स्टेशन पर साफ दिख रही है। जिले में 36 लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं।
अभी भी 28 लोगों का पता नहीं है। लोगों को तिरपाल और चावल तक नहीं पहुंच रहे हैं। राज्य में एक समान राहत सामग्री बांटने और प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ शनिवार को एक दिन की भूख हड़ताल रखी है। उन्होंने कहा पहले तो सद्दल में भूस्खलन में दब रहे लोगों के बचाव कार्य और फैसले लेने में देरी और अब लोगों के लिए चावलों की दुर्गति का जिम्मेदार प्रशासन है।
सद्दल में लोग भूस्खलन में दब गए। अब बचे हुए लोगों को भूखों मारने में पर जिला प्रशासन तुला हुआ है। उन्होंने इन दोनों मामलों में न्यायिक जांच की मांग भी की।