जम्मू। दशकों पुराने केएएस अफसरों की वरिष्ठता के विवाद को सुलझाने के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। कमेटी ने पाया कि राजनीतिक छत्रछाया में काफी संख्या में पिछले दरवाजे तथा बिना योग्यता के केएएस अफसर बनाए गए। इनमें से कुछ प्रशासन में महत्वपूर्ण ओहदों पर बैठे हुए हैं। इन्होंने अपने को आईएएस कैडर में शामिल करने के लिए नियमों की अनदेखी तथा वरिष्ठ अधिकारियों के अधिकारों का दमन करते हुए अपने नाम भेजे हैं। कुछ प्रभावी तथा पिछले दरवाजे से नियुक्त अफसरों की कृपा से कई अपात्र लोगों ने जम्मू-कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस रूल्स 1979 का लाभ उठाया। इससे योग्य अफसरों के साथ अन्याय हुआ।
प्रशासन ने दो मार्च को वरिष्ठता मामले के समयबद्ध तरीके से परीक्षण के लिए कमेटी का गठन किया था। सूत्रों के अनुसार कमेटी ने जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें वर्षवार उपलब्ध रिक्त पदों को आधार बनाया गया है। पिछले दरवाजे से होने वाली नियुक्तियों को सूची के अंत में रखा गया है। इसके अलावा जिनके पास न्यूनतम योग्यता स्नातक की नहीं है उन्हें सूची के सबसे आखिर में रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि केएएस अफसरों की सभी फाइलें अब जीएडी में हैं। सभी की निगाहें जीएडी तथा मुख्य सचिव की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। उप राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू की ओर से यह साफ हिदायत दी गई है कि एक बार पूरी सख्ती से बिना किसी भेदभाव, पक्षपात तथा दबाव के वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप दिया जाए।
वरिष्ठता सूची के निर्धारण के लिए कमेटी का गठन उप राज्यपाल तथा मुख्य सचिव को कई आपत्तियां मिलने के बाद की गईं। कमेटी ने एक जनवरी 2004 से एक दिसंबर 2008 के बीच टाइम स्केल में नियुक्त किए जाने के मामले में परीक्षण किया।