वेद मंदिर अंबफला में वैदिक सम्मेलन के दूसरे दिन विद्वानों ने रखे विचार
जम्मू। वेद मंदिर अंबफला में शनिवार को वैदिक सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत चार वेदों के पाठ से हुई। पहले सत्र में उज्जैन के अखिलेश्वर मिश्र, उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री नरेन्द्र, संस्कृत भारती संत श्री वागीशस्वरुप, कमेटी अध्यक्ष सुरेश गुप्ता उपस्थित रहे। नरेंद्र ने जम्मू कश्मीर की पावन भूमि पर मां शारदा देवी, बाबा अमरनाथ एवं अनेक संतों व विद्वानों को स्मरण किया। कहा कि यहां मां वैष्णो देवी विराजमान हैं। जिस देश की भाषा संस्कृत होती है उसका विश्व में परिचय होता है। मगर लोग भारतीय संस्कृत और वेदों को भूल रहे हैं।भक्तों का ज्ञानवर्धन करते कहा कि वेदों के 6 अंग हैं। वेद और संस्कृत को बचाने के लिए महिलाओं की भूमिका अहम है। वैदिक सम्मेलन के माध्यम से जनजागरण की जरूरत है। भारत में वसुधैव कुटुंबकम् की परिकल्पना हो। वेद गुरुकुल खोलने का संकल्प हो, वैदिक व्यवस्था हो, कर्म कांड और अष्टांगयोग होना चाहिए। अनुष्ठान में वेद पाठन जरूरी है। यहां तिरुपति बालाजी मंदिर जम्मू से आरसी सुब्रमण्यम, टीके साईं कृष्ण, अमित शुक्ला, वेद पंडित नीरज शुक्ला, सूर्या प्रकाश और राजेश गुप्ता उपस्थित रहे।
पुरातन संस्कृति को स्मरण करने की जरूरत
शाम के सत्र में सामवेद पाठ किया। कृष्ण मोहन पांडे ने संस्कृत और वेद रक्षा के लिए पुरातन भारतीय संस्कृति को स्मरण करने के लिए कहा। चंद्र मौली ने ज्योतिष एवं वेद व्यास की रचना व दिव्यानंद सरस्वती ने वेद की ऋचाओं पर प्रकाश डाला। शिव कुमार शर्मा ने वेदों के प्रचार-प्रसार पर विचार व्यक्त किए। विभिन्न गुरुकुल विद्यालयों के छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पारंपरिक शैली के साथ सभी को भोजन करवाया गया।