संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 अक्तूबर को इंदिरा एकादशी का व्रत है। इसमें पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण किया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति के पूर्वजों की आत्मा यमलोक या पितर लोक में कष्ट भोग रही होती है, उसकी मुक्ति के लिए इंदिरा एकादशी का व्रत रखना चाहिए। व्रत रखने से पाप से मुक्ति और बैकुंठ में स्थान मिलता है।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि नौ अक्तूबर सोमवार को दोपहर 12:36 बजे शुरू होगी। 10 अक्तूबर की दोपहर 03:08 बजे समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत मंगलवार 10 अक्टूबर को रखा जाएगा।
व्रत की पूजा विधि
श्री मल्ल माता सुकराला देवी धार्मिक ट्रस्ट के प्रधान तृप्त शास्त्री के अनुसार इंदिरा एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करें। उनको अक्षत, पीले फूल, पंचामृत, तुलसी के पत्ते, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करें। इंदिरा एकादशी व्रत की कथा सुनें।रात्रि के समय में जागरण करें। अगली सुबह स्नान और दान के बाद व्रत का पारण करें।
पितृ विसर्जन अमावस्या का श्राद्ध 14 को
जम्मू। अश्विन माह की अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस बार पितृ विसर्जन अमावस्या का श्राद्ध 14 अक्तूबर को समाप्त होगा। धर्म पुराणों के अनुसार, पितृ पक्ष में पितर धरती पर परिजनों से मिलने आते हैं। अगर किसी परिवार को पितरों के देहांत की तिथि याद नहीं हो तो उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जा सकता है। महंत रोहित शास्त्री के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या के दिन शाम को दो-दो पूड़ियों पर भोजन, चावल, फल, मिठाई, पुष्प आदि घर के मुख्य द्वार (चौखट) पर दोनों तरफ रखें। उनके ऊपर सरसों के तेल का एक-एक दीपक जलाएं, जिसका अर्थ है कि पितृ जाते समय भूखे न जाएं। दीपक जलाने का आशय उनके मार्ग को अलौकिक करना है। अंत में पितरों से प्रार्थना करें कि पितृपक्ष समाप्त हो गया है, इसलिए वह परिवार के सभी सदस्यों को आशीर्वाद देकर अपने लोक में जाएं। पितरों के निमित्त श्राद, तर्पण व पूजन करें। पात्र में सबसे पहले देवता, पितरों, गाय, कौवे, कुत्ते, चींटी के भोजन के लिए थोड़ा सा भाग निकालें, फिर ब्राह्मणों या जरूरतमंद को भोजन करवा करवाएं। संवाद