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Jammu News: आज से हेरथ, चार दिन होगी वटुकनाथ की विशेष पूजा

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कश्मीरी पंडितों ने घरों में सजाए कलश, रातभर होंगे धार्मिक अनुष्ठान
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संवाद न्यूज एजेंसी

जम्मू। कश्मीरी पंडितों का प्रमुख पर्व हेरथ शनिवार से शुरू होगा। चार दिनों तक श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। पर्व की शुरुआत वटुकनाथ (शिव-पार्वती) की पूजा से होगी।

शुक्रवार शाम कश्मीरी परिवारों ने घरों में विधि विधान के साथ कलश स्थापित किए। मान्यता है कि इस दिन वागुर (कलश) भरने के साथ शिव परिवार को आने का निमंत्रण दिया जाता है। हेरथ के पहले दिन वटुकनाथ और भैरवनाथ की विशेष पूजा होगी। परंपरा के अनुसार कश्मीरी पंडित परिवारों में शिव-पार्वती और भैरव की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। रातभर धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ चलता रहेगा। तांबे व पीतल के बर्तनों को विशेष रूप से पूजा में प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह का प्रतीक है।
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दम आलू, कश्मीरी पनीर, नंदरू आदि व्यंजन होंगे तैयार
जगती में रहने वाले दिलीप कुमार का कहना है कि 26 साल की उम्र थी जब उनका परिवार कश्मीर से पलायन कर जम्मू आया। अब काफी साल हो गए। अब भी कश्मीर में हेरथ की यादें ताजा हैं। पूरे समुदाय का एक साथ होना पर्व की रौनक याद आती है। रीति-रिवाज नहीं बदले आज भी कश्मीरी परिवारों में उत्साह और उमंग के साथ यह पर्व मनाया जाता है। गिरिजा का कहना है कि कश्मीरी समुदाय के लिए यह साल की शुरुआत का पहला त्योहार होता है। इसके लिए काफी उत्साह रहता है। काफी दिन पहले से ही साफ सफाई शुरू हो जाती है। पीतल और तांबे के बर्तन में पूजा होती है उन्हें चमकाया जाता है। दम आलू, कश्मीरी पनीर, नंदरू सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनते हैं। प्रतीक्षा का कहना है कि जब से होश संभाला जम्मू में ही हेरथ मनाते देखा है। परिवार के बड़े बुजुर्गों से कश्मीर में हेरथ की यादें सुनकर सुकून मिलता है।


कुशा के आसन और खुद पिरोए जाएंगे फूलों के हार
नगरोटा के बंसीलाल हंगलू ने बताया कि पलायन से पहले कश्मीर में हेरथ बड़े स्तर पर पूरा समुदाय एक साथ मनाता था। वर्ष 1990 में पलायन के बाद शुरुआती दो-तीन वर्षों में परिस्थितियां कठिन रहीं। इससे पर्व मनाने में भी दिक्कतें आईं। हालांकि समय के साथ हालात सुधरे और अब जम्मू में भी हेरथ उत्साह व धूमधाम से मनाया जाता है। बसंती का कहना है कि पूजा-अर्चना की विधि में कोई खास बदलाव नहीं आया है। साज सजा का पारंपरिक सामान तैयार किया जाता है। हर कलश को विधिवत आसन दिया जाता है। कुशा के आसन पर स्थापना की जाती है। फूलों के हार खुद पिराेए जाते हैं। विशाली पंडिता ने बताया कि घर में बने पूजा स्थल को विधि-विधान के साथ तैयार कर दिया है। पिछले एक हफ्ते से साफ-सफाई की जा रही है।

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महाशिवरात्रि के लिए सजे शिवालय
पीरखो मंदिर में मेला आज से

जम्मू। महाशिवरात्रि के लिए शहर भर में शिवालयों व मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। श्री रणबीरेश्वर मंदिर, आप शंभू और पीरखो जामवंत गुफा को सजा दिया गया है। पीरखो मंदिर में 14 से 17 फरवरी तक चार दिवसीय शिवरात्रि मेला लगेगा। महंत पीर राजिंदर नाथ ने बताया कि मेले का आयोजन पर्यटन विभाग जम्मू की ओर से मंदिर प्रशासन के सहयोग से किया जाएगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कई सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 14 फरवरी शाम पांच बजे मेले का उद्घाटन होगा। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। 15 फरवरी शाम चार बजे सांस्कृतिक संध्या होगी। 16 फरवरी दोपहर बाद भंडारा होगा। शाम पांच बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 17 फरवरी दोपहर तीन बजे दंगल होगा। संवाद
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महाशिवरात्रि मेला
- शिवखोड़ी धाम रनसु में 14 से 16 फरवरी तक
- पुरमंडल में 15 फरवरी को
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सज गई दुकानें, बाजारों में राैनक
बनतलाव। जम्मू नार्थ में भी महाशिवरात्रि के लिए बाजार सज गए हैं। दुर्गा नगर, जानीपुर, बनतालाब में दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ है। लोग पूजा सामग्री के साथ अन्य वस्तुएं खरीद रहे हैं। रूपनगर आप शंभू मंदिर के बाहर मेले जैसा माहौल है। फूल, खिलौने सहित अन्य चीजों की दुकानें सज गई हैं। संवाद
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