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Jammu News: अष्टभैरव जगदंबा महायज्ञ में दूसरे दिन मंत्रोच्चारण से गूंज उठा जगती

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- कश्मीरी पंडितों ने दिखाई एकजुटता, देशद्रोही ताकतों का डटकर सामना करने के लिए किया प्रेरित
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जम्मू। प्रवासी शिविर जगती में पांच दिवसीय अष्टभैरव जगदंबा महायज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चारण और जाप के स्वर गूंजने लगे। कश्मीरी समुदाय के लोगों ने परंपरागत विधियों के अनुसार सामूहिक मंत्रोच्चारण आरंभ कर दिया। मंत्रों की ध्वनि से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
दूसरे दिन कई संत आयोजन स्थल पहुंचे। इस दौरान कश्मीरी समुदाय के लोगों को संगठित रहकर आवाज को सशक्त करने और हिंदुओं को एकजुटता के साथ देशद्रोही ताकतों का डटकर सामना करने के लिए प्रेरित किया।
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वहीं फोटो गैलेरी में कश्मीरी पंडितों के साथ नरसंहार के चित्रों को देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। पनुन कश्मीर के अध्यक्ष विट्ठल चौधरी के अनुसार महायज्ञ का उद्देश्य कश्मीरी समुदाय के लिए पूर्ण इंसाफ के लिए आह्वान करना है। पिछले 36 साल में विभिन्न प्रदर्शनों के बाद भी सिर्फ आंशिक लाभ मिल पाया है, न कि इंसाफ। जिन्होंने कश्मीरी समाज के साथ बर्बरता की है उन्हें कटघरे नहीं लाया गया। इस दौरान सद्गुरु डॉ. चरुदत्त पिंगले, रमेश शिंदे (सनातन संस्था एवं हिंदू जनजागृति समिति), प्रमोद मुटालिक (राम सेना), अर्जुन संपत (हिंदू मक्कल ), स्वामी कुमार, साध्वी शिवानी दुर्गा, श्री श्री 1008 जगद्गुरु दुर्गाचार्य कंचन परमहंस, मां चेतनानंद सरस्वती (महंत, शिव शक्ति धाम हिंडन), धर्मगुरु रामदास, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, सुरेश उपस्थित रहे।

37 वर्षों से घर वापसी का इंतजार कर रहे कश्मीरी हिंदू : साहनी

शिवसेना यूबीटी के प्रदेश इकाई प्रमुख मनीश साहनी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल जगती में यूथ फॉर पनुन कश्मीर की तरफ से आयोजित पांच दिवसीय महाभियान में शामिल हुआ।

लोगों को संबोधित करते हुए साहनी ने कहा कि बीते तीन दशकों से कश्मीरी हिंदू कश्मीर में घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं। यह अपने ही देश व प्रदेश में विस्थापित का जीवन बिता रहे हैं। कश्मीरी पंडितों का महाअभियान 1990 के दशक की शुरुआत में हुए पलायन के बाद चलाया जा रहा है। इसका शिवसेना यूबीटी समर्थन करती है।

लक्ष्य हासिल होने तक संघर्ष जारी रखेंगे कश्मीरी पंडित

शहर में शनिवार को 37वें कश्मीरी पंडित नरसंहार दिवस के संबंध में हुई बैठक में तय हुआ कि संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक पनुन कश्मीर का लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता। केंद्र शासित प्रदेश के दर्जे और घाटी में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए होमलैंड की मांग को दोहराया गया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए महासचिव (संगठन) कमल बगाती ने कहा कि 1986 से घाटी में कट्टरपंथी और चरमपंथी तत्वों द्वारा कश्मीरी पंडितों के साथ जो कुछ भी किया गया उसे भूला नहीं जा सकता है। कश्मीरी पंडित समुदाय के पुनर्वास का मूल प्रश्न अभी भी बना हुआ है।
राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हल्कों में कई महत्वपूर्ण लोगों का मानना है कि अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद घाटी में सामाजिक, सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय संतुलन के स्तर पर भी बदलाव होंगे जो विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय के घाटी में पुनर्वास का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
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यहां एचएल जलाली, जेएल कौल, पीके भान, केके कौल, अशोक च्रंगू, वीके मट्टू, समीर भट और विक्रम सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे। वरिष्ठ भाजपा एवं कश्मीरी पंडितों के नेता अश्विनी कुमार च्रंगू विशेष अतिथि वक्ता के रूप में सत्र में शामिल हुए।
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