संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नवरात्र के उपलक्ष्य में दीवान मंदिर में रामलीला जारी है। लगातार बारिश के बीच भी भक्तों का उत्साह बरकरार है। सोमवार रात साढ़े 9 से 12:30 तक मंचन हुआ। इस दौरान फुलवारी, जनक दरबार, सीता स्वयंवर, कोप भवन, वनवास और केवट वार्तालाप के प्रसंग दिखाए गए। फुलवारी में दिखाया कि पहली बार मां सीता और प्रभु राम एक-दूसरे को देखते हैं और मन ही मन चाहने लगते हैं। इसी बीच जयकारे शुरू हो जाते हैं।
ताड़का वध के बाद भगवान राम राजा जनक के दरबार में जाते हैं। वहां सीता स्वयंवर चल रहा होता है। कोई भी शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा नहीं पाता। यह देखकर राजा जनक दुखी मन से बोलते हैं कि लगता है विश्व में कोई योद्धा शेष नहीं बचा है, जो भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा कर बेटी से विवाह कर सके। यह सुनते ही लक्ष्मण जी क्रोधित हो जाते हैं और राम जी को धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने को बोलते हैं। ऐसा करते ही प्रभु राम और मां सीता का स्वयंवर हो जाता है।
इसी बीच कोप भवन में मां कैकई अपने पुत्र को राजा बनाने के लिए कहती है और राजा दशरथ से दो वचन लेने की बात करती है। कहती हैं कि मेरे बेटे को राजा बनाया जाए और राम को 14 वर्ष का वनवास दिया जाए। इतना सुनते ही राम जी वन जाने की बात रखते हैं और कहते हैं, अगर मेरी माता ने यह सोचा है तो वन की ओर प्रस्थान करुंगा। राम जी को वन में जाते देख मां सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ चल पड़ते हैं।
केवट भगवान राम से कहते हैं कि पहले आप मुझे चरण धोने की अनुमति दें, फिर नाव पर चढ़े। क्योंकि आपके छूने से अगर पत्थर एक औरत बन सकती है तो नाव औरत बन गई तो घर का गुजारा मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद केवट चरण धोकर भगवान राम, मां सीता और लक्ष्मण जी को गंगा पार करवाते हैं। मां सीता अंगूठी निकालकर उन्हें उतराई देती है तब केवट कहते हैं कि उतराई नहीं चाहिए क्योंकि उतराई में मोक्ष मांगना चाहता हूं। जैसे आपको गंगा पार करवाई है वैसे मुझे भवसागर पार करवाएं। राम विनय शर्मा, मां सीता संजना, लक्ष्मण साहिल, राजा दशरथ आरके नारंग, केकेई अमरजीत कौर और केवट का किरदार कृष्ण लाल और जगमोहन ने निभाया।