अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। चैत्र नवरात्र इस वर्ष नौ अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के लिए जम्मू-कश्मीर के विभिन्न मंदिरों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस बीच भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर उत्तरी कश्मीर के जिला कुपवाड़ा के टीटवाल गांव में स्थित माता शारदा मंदिर में भी चैत्र नवरात्र और नवरेह को लेकर विशेष तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
नवरेह कश्मीरी हिंदू कैलेंडर के मुताबिक नववर्ष का पहला दिन होता है। नवरेह मनाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में विस्थापन की पीड़ा झेल रहे कश्मीरी पंडित समुदाय के कई लोग घाटी पहुंचते हैं। माता शारदा मंदिर किशनगंगा नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर को लेकर कश्मीरी पंडितों में गहरी आस्था है। हाल ही में नदी के किनारे घाट का निर्माण किया गया। माघ पूर्णिमा के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय के लोग स्नान के लिए पहुंचे थे। सेव शारदा समिति के प्रमुख रविंद्र पंडिता ने बताया कि माता शारदा मंदिर के द्वार पर किशनगंगा नदी पर बने नवनिर्मित घाट और मंदिर को जाने वाले रास्ते पर साइन बोर्ड लगा दिए गए हैं, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। नवनिर्मित शारदा मंदिर में विभाजन के बाद इस साल दूसरी बार शारदीय नवरात्र की पूजा आयोजित की जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। बीते साल 23 मार्च को गृहमंत्री अमित शाह ने नवनिर्मित शारदा मंदिर का शुभारंभ किया था। अब शारदा माता मंदिर की घंटियों की गूंज एलओसी के पार चिलियाना गांव तक सुनाई देती हैं।-
कबाइलियों ने जला दिया था पूरे गांव को
1947 से पहले यहां पर मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा हुआ करते थे। विभाजन के दौरान हुए कबायली हमले में टीटवाल गांव को जला दिया था। अब यहां एक बार फिर माता शारदा मंदिर और गुरुद्वारे का निर्माण किया गया है। पुराने मंदिर और गुरुद्वारा के स्थान पर ही इनका फिर से निर्माण हुआ है।