अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। ज्येष्ठ संक्रांति 15 मई को है। सुबह 11 बजकर 44 मिनट पर सूर्यदेव वृष राशि में प्रवेश करेंगे, इसलिए इसे वृष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन से ज्येष्ठ महीना प्रारंभ हो जाता है। संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 5 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा। सोमवार को अपरा एकादशी व्रत भी है।
महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि सनातन धर्म में ज्येष्ठ संक्रांति का काफी महत्व है। इस दिन को पवित्र नदियों, सरोवरों में स्नान एवं दान-पुण्य के लिए बड़ा अच्छा माना गया है। पूजन के बाद गुड़, तेल, जल से भरा घड़ा, पंखा, वस्त्र, फल इस विश्वास से दान किए जाते हैं कि अगले जन्म में इन चीजों की कमी न होगा। लोग घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। जरूरतमंद लोगों को दान अवश्य करें। मान्यता है कि पानी में तिल डालकर स्नान करने से बीमारियां दूर और दीर्घायु होती है। संक्रांति वृष, मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर एवं मीन राशि वालों के लिए शुभ होगी।