जम्मू। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को सिद्धि विनायक का व्रत शुक्रवार 10 सिंतबर को है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को कलंक चतुर्थी, पत्थर चौथ एवं अन्य नामो से भी जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्र पद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि मध्याह्न काल में हुआ था, इसीलिए दोपहर का समय गणेश पूजा के लिए शुभ माना जाता है। शुक्रवार सुबह 11:09 बजे भद्रा शुरू होगी और रात्रि 09:58 बजे पर समाप्त होगी। जो भक्त अगर भद्रा का विचार करते हैं तो वे 10 सिंतबर सुबह 11:09 बजे से पहले श्रीगणेश का पूजन कर सकते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु, मकर राशि में रहे तो भद्रा पाताल लोक की होती है। भद्रा जब पाताल लोक की होती है तो शुभ कार्य कर किए जा सकते हैं। 10 सिंतबर को भद्रा तुला राशि में है, इसलिए गणेश चतुर्थी पर भद्रा का गणपति पूजन एवं स्थापना पर कोई प्रभाव नहीं रहेगा। अगर भक्त मध्याह्न काल के दौरान श्रीगणेश पूजन करते हैं तो वे दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 01:43 बजे के मध्य पूजन करें। महंत रोहित शास्त्री के अनुसार शुक्ल चतुर्थी को मध्यान्ह काल में हस्त और चित्रा नक्षत्र, ब्रह्म योग, वणिज करण, तुला राशि के चंद्रमा, सिंह राशि में सूर्य होंगे। इस दिन चंदर अस्त रात्रि 09 बजे होगा, इस चतुर्थी पर चंद्र दर्शन करना वर्जित है। श्रीगणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी के दिन तक गणेशोत्सव मनाया जाता है। कई भक्त तीन या पांच दिन तक गणपति की मूर्ति स्थापित करते हैं। कोरोना के कारण सार्वजनिक स्थानों के बजाय अपने घर पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।