भारत-पाकिस्तान युद्धों के विस्थापितों ने की बैठक, एक मुश्त 30 लाख के पैकेज की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा/रामगढ़। जिले के रामगढ़ में भारत-पाकिस्तान के मध्य हुए 1947, 1965 व 1971 के युद्ध में विस्थापित हुए परिवारों के सम्मेलन में लंबे समय से लंबित मुद्दों पर चर्चा की गई। रविवार को विस्थापितों ने कहा कि नए रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में ज्यादातर विस्थापित परिवार हैं, जो भारत-पाकिस्तान युद्धों के कारण प्रभावित हुए। प्रवासियों को पीओजेके में छोड़ी गई उनकी भूमि के बदले सरकारी भूमि आवंटित की गई थी।
उन्होंने कहा कि कृषि सुधार अधिनियम 1976 के लागू होने के बाद, धारा 3-ए के तहत 1947 के विस्थापितों को खाली भूमि के संबंध में अधिभोग अधिकार प्रदान किया गया है। लेकिन, उक्त अधिनियम के प्रावधानों को 1965 व 1971 के विस्थापितों तक विस्तारित नहीं किया गया। परिणामस्वरूप राज्य सरकार द्वारा पुनर्वासित किये गये व्यक्ति स्वामित्व के अधिकार से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि 1965 और 1971 के ज्यादातर पीओजेके शरणार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों में तत्कालीन सरकारों ने स्वामित्व अधिकार दिए बिना कृषि भूमि पर आवासीय भूखंड प्रदान किए गए थे। उन्होंने अनुरोध किया प्रदेश प्रशासन जल्द अन्य पीओजेके डीपी कॉलोनियों के लिए लागू गांवों के लिए इसी तरह के नियमों के आदेश जारी करें।
उन्होंने विस्थापित परिवारों की संस्कृति व परंपरा को संरक्षित करने के लिए पीओजेके के शहीदों की याद में बनाए जाने वाले स्मृति भवन निर्माण की घोषणा का स्वागत किया। केंद्र सरकार से अपील की कि विस्थापित परिवारों को एक मुश्त 30 लाख का पूर्ण मौद्रिक पैकेज, कृषि भूमि के स्वामित्व अधिकारों का अनुदान, विधानसभा और संसद में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अनुदान, देश में तकनीकी / मेडिकल कॉलेजों / विश्वविद्यालयों में शिक्षा में विस्थापितों को आरक्षण, विस्थापित परिवारों के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए विशेष रोजगार पैकेज, आदि दिया जाए। मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना व भाजपा शरणार्थी प्रकोष्ठ जिला सांबा के सुरजीत सिंह सलाथिया ने आश्वासन दिलाया कि उनकी मांगों को एलजी प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा।