संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। श्री सनातन धर्म सभा के हाल में जारी शिव महापुराण की कथा के दौरान शनिवार को सूरज कौशल ने बताया कि महाप्रलय के समय जहां एक तरफ सब विनाश हो गया वहीं भगवान शिव ही व्यापक रहे। उनके साथ केवल आकाश ही बचा था।
महाप्रलय के समय सूर्य, चंद्रमा, ग्रह, तारे, वायु, पृथ्वी, जल वगैरह सब नष्ट हो गया। जंगल तक तबाह हो गए। अनंत स्वरूप परमानंद सदाशिव ही व्यापक रहे। इसी को पंडित अर्वाचीन तथा प्राचीन ईश्वर की मूर्ति कहते हैं। शिव ने शिवलोक क्षेत्र की रचना की जो आज काशी के नाम से जाना जाता है।
प्रलयकाल में भी यह क्षेत्र भगवान शिव-पार्वती से रहित नहीं रहता है। सूरज कौशल ने कहा कि भगवान शिव सर्वप्रिय हैं। श्रावण महीने में उनकी पूजा का विशेष महत्व है। जो व्यक्ति पूरा महीना व प्रत्येक सोमवार मंदिर में जाकर भोले बाबा की पूजा कर जल चढ़ाता है उसके पाप कष्ट दूर होते हैं। कथा संपन्न होने पर आरती की गई और प्रसाद बांटा गया।