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Jammu News: एमडी, एमएस, डीएनबी अध्ययन के 214 शोध प्रस्तावों को मंजूरी

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जीएमसी जम्मू में हुई संस्थागत आचार समिति की पूर्ण बोर्ड बैठक को संबोधित करते प्रो. (डा.) संजय भ
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जम्मू। जीएमसी जम्मू के एनएमसी हाल में हुई जीएमसी जम्मू की संस्थागत आचार समिति (आईईसी) की दो दिवसीय छठी पूर्ण बोर्ड बैठक में एमडी, एमएस, डीएनबी अध्ययन प्रोटोकॉल शोध प्रस्तावों को अनंतिम मंजूरी दी गई। इसमें 2023-2026 बैच के एमडी/एमएस/डीएनबी छात्रों के साथ संकाय और रेजीडेंट द्वारा गैर-सारांश प्रोटोकॉल के 214 शोध प्रस्तावों (सारांश) की मंजूरी पर मुहर लगाई गई है।
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बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डॉ.) सुभाष भारद्वाज (कार्यवाहक अध्यक्ष) ने जोर दिया कि विभागाध्यक्ष और मार्गदर्शक आईईसी को प्रस्तुत करने से पहले विभाग के भीतर अनुसंधान प्रस्तावों की जांच करें, ताकि परियोजनाओं की गुणवत्ता बनी रहे। आईईसी जीएमसी के सदस्य सचिव प्रो.(डा.) संजय भसीन ने बताया कि आईईसी एक स्वतंत्र निकाय है जो सीडीएससीओ-आईसीएमआर और डीएचआर दिशानिर्देशों के अनुसार काम करता है। उन्होंने सदस्यों से गत मार्च में हुई पूर्ण बोर्ड बैठक के मिनटों की मंजूरी ली। बताया कि आईईसी जीएमसी जम्मू, जीएमसी जम्मू, सभी परिधीय जीएमसी, सभी जिला अस्पतालों, एसएमवीडी, जम्मू विश्वविद्यालय और नर्सिंग कॉलेजों के शोधकर्ताओं के लिए अनुसंधान प्रस्तावों की नैतिक मंजूरी का काम करता है। अब तक आईईसी जीएमसी जम्मू द्वारा 541 सिनोप्सिस को मंजूरी दी गई है।
जीएमसी के प्रिंसिपल डाॅ. आशुतोष गुप्ता ने कहा कि हर जिम्मेदारी गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान पर रखी जानी चाहिए, जिसके लिए संकाय, विभागाध्यक्ष और आईईसी सदस्यों के बीच लगातार बैठकें और चर्चाएं होनी चाहिएं। किसी भी चिकित्सा संस्थान का मुख्य फोकस 30 प्रतिशत शिक्षण, 30 प्रतिशत अनुसंधान, 30 प्रतिशत रोगी देखभाल और 10 प्रतिशत अन्य चिकित्सा संबंधी कार्य होता है। गुणवत्तापूर्ण मेडिकल स्नातक और स्नातकोत्तर तैयार करने के लिए अनुसंधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के हित में संस्थान की ओर से आईईसी जीएमसी जम्मू को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। शोधकर्ताओं को आईसीएमआर और अन्य वैज्ञानिक अनुसंधान निकायों से गुणवत्तापूर्ण वित्त पोषित परियोजनाएं प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। बैठक में 62 स्नातकोत्तर छात्रों ने अपने अध्ययन (श्रेणी ए) प्रस्तुत किए। इसके अलावा 78 श्रेणी बी और 59 श्रेणी सी अध्ययन पूर्ण बोर्ड की मंजूरी के लिए पेश किए गए थे। 18 गैर-सारांश अध्ययनों को भी मंजूरी दी गई। इस दौरान प्रो. घनश्याम देव, प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. रवींद्र गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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